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बीकानेर-झुंझुनूं में भी वोटिंग से होगा प्रत्याशी का चयन
जयपुर - विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद अब पार्टी सबसे छोटे स्तर तक के कार्यकर्ताओं और जनता की राय से ही लोकसभा प्रत्याशी तय करेगी। राज्य में पार्टी पहले की तरह स्क्रीनिंग कमेटी का उपयोग नहीं करेगी। झुंझुनूं और बीकानेर में तो इस प्रक्रिया के लिए मतदान भी कराया जाएगा। इसके लिए झुंझुनूं की वोटर लिस्ट तैयार हो चुकी है और बीकानेर की अब तैयार की जाएगी। पंचायतीराज संस्थाओं एवं स्थानीय निकाय संस्थाओं के पार्टी के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में अपनाई गई स्क्रीनिंग की प्रक्रिया सफल नहीं रही, इसलिए उसे नहीं अपनाया जाएगा।
इसमें जनता को शामिल किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के सभी नेताओं ने भाग लिया, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व केंद्रीय मंत्री सी.पी. जोशी नहीं आए।
वहीं राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी एवं महासचिव गुरुदास कामत ने विधानसभा चुनाव में हार को संगठन की कमजोरी, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार नहीं होना बताया। इसके बावजूद भी कार्यकर्ताओं ने हिम्मत नहीं हारी है। लोकसभा चुनावों में इसका बदला लेना है। इसके लिए अभी से काम करना होगा।
स्थानीय लोग तय करेगी प्रत्याशी
बीकानेर और झुंझुनूं में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी का चयन इस ग्राम स्तर के नेता और वहां के लोग तय करेंगे। इसके लिए वोटिंग प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें जिलाध्यक्ष, कार्यकारिणी, पुराने नेता, सरपंच, जिला प्रमुख वोट करेंगे। जिस प्रत्याशी को सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वहीं क्षेत्र में लोकसभा चुनाव लड़ेगा।
साहब बोल लिया, रह बा दो, डूबो दिया
सम्मेलन में जैसे ही पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला का भाषण खत्म हुआ और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष चंद्रभान को भाषण के लिए आमंत्रित किया। इसी दौरान मंच के सामने बैठा एक कार्यकर्ता उठा और बोला- साहब रहबा दो बोल लिया, पांच साल से बोल ही रहा छच्यो, फिर भी डूबो दिया। इस पर कार्यकर्ता जोरदार हंसने लगे। मंच से आग्रह आने के बाद कार्यकर्ता बैठा, तब जाकर मामला शांत हुआ।
प्रदेश कार्यकारिणी में नहीं होगा बदलाव
पायलट ने कहा कि फिलहाल वो प्रदेश कार्यकारिणी में कोई परिवर्तन नहीं करेंगे। पूर्व के पदाधिकारी अपने पद पर काम करते रहेंगे। वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नकारात्मक राजनीति कर रही है। उन्होंने पांच साल के लिए कोई कार्य योजना तैयार नहीं की। इससे लगता है कि सरकार सिर्फ लोकसभा चुनाव तक काम करना चाह रही है।
कामत की ना, असलियत में हां?
सवाल था : क्या जेनरेशन शिफ्ट हो रहा है। कामत बोले : नहीं, लेकिन उन्होंने आगे कहा : गहलोत-जोशी का भी मार्गदर्शन लिया जाएगा। इस सियासी भाषा का कांग्रेस की भाषा में अर्थ ये है कि अब ये दोनों नेता सम्मानित मार्गदर्शक रहेंगे!
कामत ने कहा : अब तक के फैसलों में भी उनसे यानी गहलोत जोशी से विचार विमर्श किया गया। मतलब ये कि पार्टी में जेनरेशन शिफ्ट का दौर गहलोत और जोशी दोनों नेताओं की सहमति से ही केंद्रीय हाईकमान ने किया है।
उधर कामत ने कहा, सरकार
नहीं, संगठन जिम्मेदार
प्रदेश प्रभारी गुरुदास कामत बोले : उम्मीद नहीं थी कि ऐसे परिणाम आएंगे। लेकिन हार के लिए सरकार नहीं, संगठन जिम्मेदार है। संगठन के लोग ही घर-घर जाकर सरकार के कामों का प्रचार करते हैं। सरकार घर-घर नहीं जाती। संगठन ने अपनी भूमिका सही नहीं निभाई। कार्यकर्ताओं ने सरकार के कामों का प्रचार-प्रसार ठीक से किया होता तो यह स्थिति नहीं होती। लेकिन अब कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव के लिए फिर तैयार है।
चंद्रभान ने सरकार और आपसी फूट को ठहराया हार के लिए जिम्मेदार
बनीपार्क में हुए पार्टी के पंचायती राज प्रतिनिधियों के सम्मेलन में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान ने कहा : सरकार ने कार्यकर्ता की नहीं सुनी इसलिए हारे। सरकार होती है तो कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं होता। अब सरकार नहीं है तो कार्यकर्ता संतुष्ट है। हमारी हार के कारण भ्रष्टाचार, महंगाई और सत्ता विरोधी लहर तो रही ही है, सबसे बड़ा कारण तो आपसी खींचतान भी था। हमारे क्षेत्रीय नेता दूसरे लोगों को आगे नहीं आने देना चाहते। हमारी लड़ाई विपक्ष के नेताओं से नहीं, हमारे ही अपने नेताओं से है।