नैनसुख चित्रों में मुगल शैली
लाइट शो के माध्यम से अमेरिकी जॉन सिलर ने भारतीय पेंटिंग और नैनसुख कला पर दिया प्रजेंटेशन
सिटी रिपोर्टर जयपुर
नैनसुख एक पहाड़ी चित्रकार और फाल्कन शैली में पारंगत थे। नैनसुख की पेंटिंग और उनकी शैलियों पर अमेरिकी प्रोफेसर जॉन सिलर ने कुछ ऐसा ही सचित्र व्याख्यान दिया। मौका था महाराजा सवाई भवानी सिंह जयपुर म्यूजियम सोसाइटी के गुणीजन खाना की ओर से आयोजित कार्यक्रम का। म्यूजियम से जुड़े यूनुस खिमाणी ने बताया कि गुणीजन खाने की ओर से भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। यह उन्हीं कार्यक्रमों की पहली कड़ी है। प्रजेंटेशन के दौरान जॉन सिलर ने कहा, कुछ विद्वान स्वीकार करते हैं कि मुगलों ने भारतीय चित्रकला में फाल्कन पेंटिंग शैली को ईजाद किया, लेकिन इसकी शुरुआत संभवत पंजाब हिल्स में हुई।
इस बारे में ज्यादातर चुप्पी साध लेते हैं कि इसकी शुरुआत कहां, कब और कैसे हुई। अब यह बड़े विश्वास के साथ माना जाने लगा है कि इसकी शुरुआत पंजाब हिल्स के जम्मू वाले क्षेत्र में संभवत: 1730 के आसपास हुई होगी। वे इस मामले में पहाड़ी पेंटिंग के पुरखे शिव और उनके दो बेटों मनकू और नैनसुख का जिक्र करते हैं। अब समझा जाता है कि फाल्कन पेंटिंग नैनसुख के दीर्घकालिक कला जीवन के शुरुआती दौर से जुड़ा काम है।