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, गांवों में कोई डॉक्टर रुकना ही नहीं चाहता

7 वर्ष पहले
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विसं. जयपुर - प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों के खाली पदों के कारण चरमराई हुई चिकित्सा व्यवस्था पर विधानसभा में बुधवार को कई विधायकों ने सवाल उठाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को आ रही दिक्कतों का सरकार को अहसास कराया गया, वहीं सुझाव भी दिए कि डॉक्टरों को सरकारी सेवा से जुडऩे के लिए प्रोत्साहन दिया जाए और उनका वेतन बढ़ाया जाए।
पूर्व चिकित्सा राज्य मंत्री और निर्दलीय विधायक डॉ. राजकुमार शर्मा ने तो यहां तक कह दिया कि मुझे पता है अस्पतालों के क्या हाल हैं? सारे अस्पताल ऑक्सीजन पर चल रहे हैं। डॉक्टरों का सरकारी सर्विस से मोह भंग हो रहा है। कोई डॉक्टर गांवों में तो रुकना ही नहीं चाहता। रुके भी क्यों, उसे इतना पैसा ही नहीं मिलता कि उसकी विशेषज्ञता का सम्मान हो। पिछली सरकार में हमने 16 हजार से बढ़ाकर मेडिकल ऑफिसर का वेतन 30 हजार रुपए किया। गांवों में काम करने वालों को अलग से भत्ता शुरू किया, लेकिन डॉक्टर फिर भी गांवों में काम करने के लिए तैयार नहीं। सरकार को चाहिए कि वेतन 30 हजार से बढ़ाकर एक लाख करे, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों का सरकारी सेवा के प्रति उत्साह बढ़े। राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान भाजपा के ओम बिड़ला ने पिछली सरकार पर आरोप लगाया- कांग्रेस ने कई योजनाओं पर अनाप-शनाप पैसा बहाया, लेकिन रोजगार और चिकित्सा क्षेत्र पर कोई ध्यान नहीं दिया।



आज भी कई अस्पतालों में डॉक्टर नहीं है। भाजपा के विट्ठल शंकर अवस्थी ने कहा कांग्रेस सरकार ने चिकित्सा का स्ट्रक्चर बिगाड़ कर रख दिया। मुफ्त दवाएं, मुफ्त जांचों की घोषणाएं की लेकिन उन योजनाओं को लागू करने के लिए संसाधन विकसित नहीं किए। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं लगाए। कई पद खाली पड़े हैं। डॉ. राजकुमार शर्मा ने कहा-चिकित्सा विभाग में मैंने काम किया है, कुछ सुझाव देना चाहता हूं। डॉक्टरों की कमी का मामला पहले भी उठता रहा है, आगे भी ऐसा ही चलेगा, क्योंकि कोई डॉक्टर सरकारी सेवा में आना ही नहीं चाहता। उन्होंने कहा डॉक्टरों को सरकारी सेवा में तब ही जोड़कर रखा जा सकता है, जबकि इनका वेतन बढ़े।
सीकर में मेडिकल कॉलेज खोल दो, पांच जिलों का एसएमएस से भार कम हो जाएगा
एसएमएस अस्पताल पर मरीजों का बोझ कम करने के लिए राजकुमार शर्मा ने सरकार को सुझाव दिया कि सीकर में मेडिकल कॉलेज खोल दो। चुरू, झुंझुनूं, सीकर, गंगानगर, हनुमानगढ़ के मरीजों का इलाज भी हो जाएगा। एसएमएस अस्पताल का भार भी कम हो जाएगा। ऐसा ही अलवर में मेडिकल कॉलेज खोलकर आसपास के अन्य चार-पांच जिलों के मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा सकता है।

500 से ज्यादा डॉक्टर चाहते हैं सरकारी नौकरी छोडऩा
कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व वित्त मंत्री प्रद्युम्रसिंह ने कहा- चिकित्सा विभाग में पांच सौ से ज्यादा डॉक्टरों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ((वीआरएस)) की एप्लीकेशन्स दे रखी है। सरकार उन एप्लीकेशन्स पर कार्रवाई नहीं कर रही, इसलिए वे डॉक्टर मजबूरी में काम कर रहे हैं। हमारी सरकार ने काफी कोशिश की, अब नई सरकार कोशिश करके देखें कि गांवों की चिकित्सा व्यवस्था कैसे सुधारी जा सकती है।