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यह कुनबा नहीं, कब्र है भावनाओं की

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर जयपुर
रवींद्र मंच पर गुरुवार को आयाम संस्था के बैनर पर स्पेनिश क्रांतिकारी और कवि फेदरिको लोर्का के नाटक ‘द हाउस ऑफ बरनार्डा अल्वा’ के हिंदी रूपांतरण ‘बिरजिस कदर का कुनबा’ का मंचन किया गया। इसका निर्देशन जयपुर थिएटर के युवा रंगकर्मी सूफियान खान ने किया। कुछ वर्षों पूर्व यही नाटक वरिष्ठ रंगकर्मी साबिर खान के निर्देशन में भी मंचित किया जा चुका है।
‘बिरजिस कदर’ एक ऐसी महिला की हताशा की कहानी है, जो सामाजिक बंधनों और पुरुषों द्वारा थोपी गई अनावश्यक बंदिशों की शिकार होकर कुंठित हो जाती है। बाद में वो अपनी पांच बेटियों को भी अपनी कुंठा का शिकार बनाती है। नाटक में इस कथानक के माध्यम से उन सामाजिक रूढिय़ों और बंधनों पर तीखे प्रहार किए गए हैं, जिनकी वजह से औरत प्रताडि़त और उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर हो जाती है। इस नाटक की खासियत इसमें एक भी पुरुष पात्र नहीं होना है।