साकार हुआ लोक संस्कृतियों का संगम
भास्कर न्यूज. झुंझुनूं.
म्हारी घूमर छ नखराळी ए माय, कदि भुल के भी साडी गली आदि गीत-नृत्यों के जरिए छात्राओं ने मंच पर विभिन्न संस्कृतियों का संगम पेश किया। मौका था रामादेवी गल्र्स पीजी कॉलेज हरनाथपुरा नूआ के वार्षिक समारोह सरस्वती संगम का।
मां शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्र\\\'\\\'वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। छात्राओं ने राजस्थानी, हिंदी, पंजाबी आदि गीतों पर शानदार नृत्य प्रस्तुतियां दी। निकिता चौधरी ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ मर्मस्पर्शी कविता पेश की तो सभी की आंखें नम हो गई। प्राचार्या डॉ. संपत शर्मा ने संस्था का वार्षिक प्रतिवेदन पढ़ा।
मुख्य अतिथि डॉ. दयाशंकर बावलिया ने कहा कि समाज की उन्नति तभी संभव है प्रत्येक नारी शिक्षित हो। उन्होंने कहा कि आज की मेहनत कल के भविष्य निर्माण में सहायक होगी।समारोह की अध्यक्षता करते हुए ग्यारसीलाल जाट ने पाश्चात्य संस्कृति को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते हुए भारतीय संस्कृति के प्राचीन नैतिक मूल्यों को अपनाने की जरूरत बताई। संस्था चेयरमैन शिशुपाल सिंह पूनियां ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। नगर परिषद सभापति खालिद हुसैन, गवर्नमेंट गल्र्स कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जयलाल सिंह, जीएम डीआईसी मनीराम, टेकचंद शर्मा, आईएएस विजय भारती, डॉ. चेतन जोशी, सुमित भगासरा, डॉ. राजेश बाबल विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमाकांत शर्मा, मुकेश कृष्णिया व प्रियंका नारनोलिया ने किया।