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यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स ने पॉकेट मनी से बनवाया कक्षाओं का फर्नीचर
रविंद्र शर्मा - जोधपुर
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान ((बॉटनी)) विभाग में रोजाना टूटने वाले फर्नीचर से तंग आकर स्टूडेंट्स ने पॉकेट मनी से पैसा बचाकर फर्नीचर बनवा दिया। टेबल-कुर्सियां तो पत्थर की बनवाई ताकि लंबे समय तक न टूटें। साथ ही प्रत्येक स्टूडेंट के लिए टेबल के नीचे ही लकड़ी की अलमारी भी बनवा दी, जिसमें वे बैग व अन्य सामग्री रख सकें। विभाग में नियमित क्लासें लगने और लैब में लकड़ी के फर्नीचर पर आए दिन केमिकल गिरने या इधर-उधर खिसकाने से यह खराब हो जाता था। विवि प्रशासन ने बीते दस साल में विभाग को तकरीबन एक लाख रुपए की टेबल-कुर्सियां खरीदकर दी, लेकिन ये बैठने लायक नहीं हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स और टीचर्स ने खुद ही करीब दो लाख रुपए इकट्ठे कर पांच कमरों में जोधपुरी पत्थर से बेंचें बनवाकर उन पर टाइलें लगवा दी। शुरुआत करीब दो साल पहले प्रयोगशाला से हुई थी। इसमें टीचर्स ने 40 हजार व स्टूडेंट्स ने 10 हजार रुपए का सहयोग किया। बाद में क्लास रूम में पत्थर के स्टैंड बनाने का काम शुरू करवाया गया। इसमें टीचर्स ने 90 हजार और स्टूडेंट्स ने 50 हजार रुपए दिए। विद्यार्थियों और टीचर्स की अनूठी पहल को देखते हुए विवि प्रशासन ने भी 90 हजार रुपए दिए।
क्लासों में सजावट के लिए पर्दे व लाइटें
विवि की आर्थिक स्थिति खराब
जेएनवीयू को संभाग स्तर के विवि का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन विवि के विभागों की हालत इतनी खराब है कि समय पर मरम्मत का काम भी नहीं करवाया जा सकता। पिछले तीन साल में बॉटनी विभागाध्यक्ष प्रो.एचएस गहलोत ने विवि प्रशासन को तीन बार पत्र लिखे, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला। ऐसे में उन्होंने स्टूडेंट्स के साथ मिलकर खुद ही डिपार्टमेंट को सुंदर और स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठा लिया।
करीब डेढ़ दर्जन कक्ष वाले इस विभाग के कक्षा-कक्षों में हर साल पुताई का काम भी होता है। इस पर 30 से 35 हजार रुपए खर्च आता है। यह कार्य भी टीचर्स और स्टूडेंट्स करवाते हैं। छात्राओं की ओर से हर कक्ष में कलरफुल पर्दे, फ्लॉवर और लाइटें लगवाई गई हैं।