खराब हो रहीं दर्शक दीर्घा की कुर्सियां
डीबी स्टार. जोधपुर। अब तक पढ़ाने का अनुभव बेहतर रहा। स्टूडेंट्स अपनी प्रॉब्लम्स को आसानी से शेयर करते हैं। कई बार लगता है कि कम उम्र होने के कारण वे फ्रेंडली माहौल में ज्यादा कनेक्ट कर पाते हैं। वहीं स्टूडेंट्स का कहना है कि वे क्षितिज सर की क्लास कभी मिस नहीं करते हैं। एक फ्रेंड की तरह पढ़ाने से किसी प्रकार की झिझक नहीं रहती।
हिंदी पढ़ा रही असिस्टेंट प्रोफेसर मीता ने कहा कि हम पढ़ते थे तो सोचते थे कि कुछ टीचर केवल पढ़ाते हैं वे हमसे जुड़ते नहीं हैं। अब मैं शिक्षक बनी हूं तो यही कोशिश रहती है कि पढ़ाई के दौरान हर स्टूडेंट से जुड़ी रहूं ताकि वे अपनी प्रॉब्लम्स आसानी से शेयर कर सकें। इधर छात्राओं का कहना है कि उन्हें लगता ही नहीं कि मीता मैडम की क्लास है। वे हमें बड़ी बहन की तरह पढ़ाती हैं और हमारी मदद करती हैं।
इकोनॉमिक्स जैसे टफ सब्जेक्ट में स्टूडेंट्स की हर परेशानी दूर कर रहीं प्रो. रेखा ने कहा कि शिक्षक बनते ही निर्णय कर लिया था कि डांट-डपट की बजाय स्टूडेंट्स को दोस्त की तरह पढ़ाउंगी और उनकी हर कमजोरी को दूर करूंगी। वहीं स्टूडेंट्स ने कहा कि रेखा मैडम के व्यवहार ने हमारी सोच भी बदली है। पढ़ाने का अलग तरीका होने के साथ ही उनका नॉलेज भी अच्छा है।
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन पढ़ा रहे मनीष वडेरा ने कहा कि हम उम्र स्टूडेंट्स को पढ़ाने का अनुभव यादगार बनता जा रहा है। नए हैं तो स्टूडेंट्स की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए हाईटेक के साथ अपडेट रहना पड़ता है। हमारी कोशिश है कि हम सब एक टीम की तरह काम करें, ताकि स्टूडेंट्स को पढ़ाई में आसानी हो। स्टूडेंट्स ने कहा कि मनीष सर की क्लास में माहौल काफी बेहतर रहता है। वे ई-लर्निंग पर भी अधिक जोर देते हैं।
शहर के बरकतुल्लाह खां स्टेडियम की देखरेख व मरम्मत की जिम्मेदारी जेडीए के पास है। यहां हाई मास्ट लाइटें तो लगा दी गईं, लेकिन स्टेडियम की अन्य सुविधाओं को संभालना भारी पड़ रहा है। दर्शकों के लिए लगाई गई कुर्सियां टूट रही हैं तो उनकी हालत कबाड़ जैसी हो रही है। जेडीए के एक्सईएन घनश्याम पंवार का कहना है कि स्टेडियम में काम चल रहे हैं। जल्द ही सभी सुविधाओं को व्यवस्थित कर दिया जाएगा।