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गुजरात में रोक लगी तो जोधपुर में बढ़ गई टायर से ऑयल निकालने की अवैध फैक्ट्रियां
मनीष बोहरा :९५८७०१३९००
पुराने टायर जलाकर उनसे ऑयल निकालने के लिए जोधपुर में पांच अवैध फैक्ट्रियां खड़ी हो गई हैं। गुजरात में ऐसी फैक्ट्रियों पर रोक लगने के बाद जोधपुर में अचानक इनकी संख्या बढ़ गई है। वैसे तो इस तरह की छह फैक्ट्रियां हैं, जिनमें से एक को प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अनुमति मिली है, वह भी सभी मापदंड पूरे करने के बाद। हाल ही बोरानाडा स्थित अवैध फैक्ट्री में हुए हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। डीबी स्टार ने इन फैक्ट्रियों के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल ऐसी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के लिए फैक्ट्री एंड बायलर विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो बायलर विभाग इस मामले से खुद के हाथ खींचते हुए प्रदूषण मंडल व पुलिस की जिम्मेदारी बता रहा है।
शहर में स्थापित छह फैक्ट्रियों के बारे में जब राजस्थान राज्य प्रदूषण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय से जानकारी जुटाई तो पता चला कि वर्तमान में टायर जलाकर ऑयल निकालने वाली छह फैक्ट्रियां हैं। इनमें से एक को फैक्ट्री लगाने व चलाने की अनुमति मंडल की ओर से दी गई है। शेष ने भी अनुमति तो मांगी थी, लेकिन मापदंड पूरे नहीं करने के कारण कार्य करने की इजाजत नहीं दी गई। इन फैक्ट्रियों में प्लांट तो लग सकते हैं, लेकिन ये प्रोसेस नहीं कर सकते। बावजूद इसके फैक्ट्रियां चल रही हैं तो फैक्ट्री एंड बॉयलर विभाग के स्तर पर इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
यहीं हुई थी एक श्रमिक की मौत
बोरानाडा स्थित भाग्यलक्ष्मी फैक्ट्री में टायर से ऑयल निकालते समय 20 जनवरी को इसी रिएक्टर से दो श्रमिक झुलस गए थे। यहां खुले में ही पूरा प्रोसेस होता है जो नियम विरुद्ध है।
दरअसल ऐसी फैक्ट्री में करीब 10 टन क्षमता के रिएक्टर में टायर डालकर उसे 400 डिग्री तापमान पर गर्म किया जाता है। ऐसा करने पर टायर से 5 हजार लीटर ऑयल, 2 हजार किलो कार्बन, 15 सौ किलो स्टील और लगभग इतनी ही मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन व अमोनिया गैस निकलती है। गैसों को संग्रहित करने की जगह इन्हें सीधे वायुमंडल में छोड़ दिया जाता है। इनके निस्तारण व संग्रहण के लिए तय सुरक्षा के मापदंड पूरे नहीं होने से ये फैक्ट्री में काम करने वालों के साथ आसपास के लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
फोटो : पूरणसिंह
 हम कार्रवाई नहीं कर सकते
नए प्रावधानों के तहत किसी फैक्ट्री में से 10 से कम मजदूर कार्य करते हैं तो उनकी जांच विभाग की ओर से नहीं की जा सकती। टायर से ऑयल निकालने वाली फैक्ट्री में मजदूर कम ही होते हैं। जोधपुर की फैक्ट्रियों में यही स्थिति है। ऐसे में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल व स्थानीय पुलिस को ऐसी अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
डीके चौधरी, चीफ इंस्पेक्टर
फैक्ट्री एंड बॉयलर विभाग
 जिम्मेदारी बायलर विभाग की
प्रदूषण को लेकर मंडल की ओर से अनुमति दी जाती है। पांच फैक्ट्रियों के संचालन की अनुमति नहीं दी है। अब ये अवैध रूप से चल रही हैं तो इन पर कार्रवाई करने का अधिकार फैक्ट्री एंड बायलर विभाग के पास है। हादसे के बारे में फैक्ट्री एवं बॉयलर विभाग के अफसरों को पत्र लिखे हंै। इस बारे में मंडल के मुख्यालय को भी रिपोर्ट भेज दी है।
शरद सक्सेना, एईएन
प्रदूषण नियंत्रण मंडल
पड़ताल में पता चला कि टायर को जलाकर ऑयल बनाने की प्रक्रिया से वायुमंडल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके लिए फैक्ट्री में कई तरह के इंतजाम करने पड़ते हैं जो काफी खर्चीला होता है। निर्धारित मापदंड पूरे नहीं करने पर फैक्ट्री में काम करने वालों के साथ आसपास रहवासियों पर भी असर पड़ सकता है। गुजरात में इस तरह की फैक्ट्रियों से पर्यावरण व लोगों को नुकसान होने लगा तो वहां प्रतिबंध लगा दिया गया। मुंबई में इस तरह की फैक्ट्रियां कानूनी विवाद में उलझी हुई हैं। अब इनकी संख्या राजस्थान में बढऩे लगी है।
प्रदूषण के साथ ही जान की जोखिम का खतरा
एक फैक्ट्री में हादसे से मजदूर की मौत के बाद भी आपसी खींचतान में उलझे कार्रवाई करने वाले सरकारी विभाग