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प्रतिस्पद्र्धा में इनोवेशन वाले निर्यातक ही टिकेंगे : कुमार
संगोष्ठी में बोले हस्तशिल्प निर्यात संवद्र्धन परिषद के निदेशक
जोधपुर - हस्तशिल्प निर्यात संवद्र्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि जोधपुर के हस्तशिल्प ने विश्व में खास पहचान बनाई है, लेकिन अब बायर्स के टेस्ट के साथ खुद को बदलना होगा। इनोवेशन नहीं करने वाला निर्यातक प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाएगा। वे मंगलवार को यहां पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव में आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि ईपीसीएच एनसीईआरटी की तर्ज पर हस्तशिल्प के कारीगर तैयार करेगा। इसके लिए लिए कारपेट-हैंडीक्राफ्ट सेक्टर स्कीम शुरू की जा रही है। इससे कारीगरों को आधुनिक तकनीक से अवगत करवाया जाएगा। ताकि वे बायर्स की च्वॉइस के प्रॉडक्ट बनाने में विशेष कला का इस्तेमाल कर सके। उन्होंने उद्यमियों की मांग पर अक्टूबर फेयर में स्टॉल्स की संख्या बढ़ाने पर सहमति दी। कार्यक्रम में राजसिको के पूर्व चेयरमैन व उत्सव संयोजक मेघराज लोहिया ने कहा कि वसुंधरा राजे के पहले शासनकाल में सरकार ने हैंडीक्राफ्ट व ग्वारगम सेक्टर को विशेष फायदा देने के लिए ब्रह्मगुप्त औद्योगिक विकास व अनुसंधान केन्द्र की स्थापना करने का निर्णय लिया था। उसका शिलान्यास भी हो गया था लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। अब इसे विकसित किया जाएगा।
इस अवसर पर ईपीसीएच के डिप्टी डायरेक्टर राजेश रावत ने योजनाओं की जानकारी दी। जेआईए सचिव शरद जैन ने स्वागत व सुधींद्र दुगड़ ने आभार जताया। असिस्टेंट डायरेक्टर ने कुलविंदर सिंह ने बाबा आंबेडकर विकास योजना से अवगत करवाया। विशेष अतिथि विनोद जौहरी ने संबोधित किया। संचालन जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव डॉ भरत दिनेश ने किया। विनोदसिंह राजपुरोहित, कैलाश टाटिया, कमोद टाटिया, मनीष मेहता, हंसराज बाहेती, पंकज भंडारी, नरेश बोथरा, मनीष झंवर, ऋषिराज सिंह, खेमचंद खत्री, बशीर अहमद, नौशाद खान व सुबोध मिश्रा सहित कई निर्यातक मौजूद थे।
देशभर से आए कवियों को सुनने देर रात तक जमे रहे श्रोता
पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव मेले में मंगलवार को देश के नामचीन कवियों ने अपनी प्रस्तुति से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा ।