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नेहरू ही नहीं, स्टेडियम में मौजूद हर एक की आंखें थीं नम

7 वर्ष पहले
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पूनमचंद विश्नोई - जोधपुर
५० साल पहले जब दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में लता मंगेशकर ने ऐ मेरे वतन के लोगों.. गाना गाया तो पंडित जवाहरलाल नेहरू ही नहीं स्टेडियम में मौजूद हर आंख से आंसू निकले थे। स्टेडियम की भीड़ खामोश खड़ी थी। राष्ट्र ने एक दिन पहले गणतंत्र दिवस मनाया था और दूसरे ही दिन शहीदों की स्मृति में यह कार्यक्रम था। यहां पहुंचे हर शख्स के दिल में भारत-चीन लड़ाई में राष्ट्र की पराजय का दर्द था और चीन के प्रति गुस्सा भी। मैं अपने पांच दोस्तों के साथ १५ किलोमीटर साइकिल से सफर कर स्टेडियम पहुंचा था।
बड़ी मुश्किल से स्टेडियम में जगह बना पाए। वहां पैर रखने तक की जगह नहीं दिख रही थी। यह कहना है ८१ वर्षीय डीवी नारंग का। सोमवार को जब लता ने मुंबई में यह गाना दुबारा गाया तो नारंग उस दिन की यादों में खो गए। उन्होंने २७ जनवरी १९६३ के दिन दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में हुए लता के कार्यक्रम के संस्मरण भास्कर से बांटे। बताया, वो दिन मेरे लिए खास था।




हर घर में होती थी शहीदों की तस्वीर

नारंग कहते हैं, अब राजकाज व जनता दोनों का तरीका बदल चुका है। मुझे आज भी याद है उन दिनों हर घर में देवी-देवताओं की तस्वीर भले दिखती भी नहीं हो लेकिन सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह, सुखदेव व राजगुरु सहित अन्य शहीदों की तस्वीरें जरूर रहती थी।

लगा कि पूरा देश एकत्र हो गया



ञ्च १९६३ में नेहरू की मौजूदगी में लता से ‘ऐ मेरे वतन...’ सुनने वालों में मौजूद जोधपुर के डीवी नारंग से जानिए कितना अभूतपूर्व

था वह दृश्य



नारंग बताते हैं-आज भी मेरी आंखों में पूरे स्टेडियम का दृश्य आ जाता है। शाम का समय था। स्टेडियम इस कदर लोगों से अट गया था मानो पूरा भारत एकत्र हुआ हो। नेहरू क्या, वहां मौजूद हर छोटे-बड़े लोगों की आंखों से आंसू निकल रहे थे। सभी निराश थे। लता की ऐ मेरे वतन के लोगों... गाने की प्रस्तुति ने हर किसी में ऊर्जा का संचार कर दिया था।