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12 करोड़ का लोन हड़पा, फिर यूनिट की नीलामी में फर्जी फर्म बना बोली लगाई

7 वर्ष पहले
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भंवर जांगिड़ - जोधपुर
करेंसी टर्म लोन एग्रीमेंट कर आईडीबीआई बैंक, एसबीबीजे और सिंडिकेट बैंक से मुंबई के एक उद्यमी ने 16 वर्ष पूर्व जोधपुर में इंडस्ट्री लगाने के लिए 12 करोड़ रुपए का कर्ज लिया। लोन की एक किश्त भी नहीं चुकाई। पांच साल पहले कर्ज की रकम बढ़कर 34.10 करोड़ रुपए हो गई। रिकवरी के लिए जब यूनिट के नीलाम होने की नौबत आई तो उद्यमी ने खुद ही फर्जी फर्म बनाकर अपनी यूनिट फिर से खरीदने की कोशिश की।
सीबीआई ने मामले की जांच की। आईडीबीआई बैंक के छह बड़े अफसर उद्यमी की साजिश में शामिल पाए गए। लोन की रकम अब 50 करोड़ रुपए हो गई है। हाल ही में सीबीआई ने उद्यमी योगेंद्र अग्रवाल, उनकी पत्नी, बेटे और बेटी को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने बैंक अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार और सतर्कता आयुक्त से कार्रवाई के लिए कहा है। जून 2012 में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। छानबीन में आईडीबीआई बैंक के कार्यकारी ट्रस्टी, दो जीएम, दो डीजीएम और एक मैनेजर साजिश में शामिल मिले। शेष - पेज १३
इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग
आईडीबीआई बैंक ((एसएएसएफ)) के कार्यकारी ट्रस्टी बी.रवींद्र नाथ, जीएम मुकेश जैन, प्रीतपाल सिंह, डीजीएम जगदीश कनारे, सुवर्णा कामत व मैनेजर अरविंद प्रकाश सक्सेना।
सीबीआई का पत्र अभी मुझे मिला नहीं है। पत्र के तथ्य देखने के बाद उनकी विभागीय जांच की जाएगी। अफसरों के खिलाफ कार्रवाई क्या होगी, यह सीबीआई के फैक्ट देखने के बाद ही तय हो पाएगा।
- यूबी नेरूरकर, जीएम ((विजिलेंस)), आईडीबीआई बैंक, मुंबई