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डाउनलोड करेंजोधपुर। प्रतापनगर में 132 केवी जीएसएस बनकर तैयार हो गया है, लेकिन इसे अभी तक चौपासनी हाउसिंग बोर्ड जीएसएस से भूमिगत केबल से नहीं जोड़ा जा सका है। इसकी अहम वजह यह है कि चौहाबो स्थित सेंट्रल एकेडमी स्कूल से पाल लिंक रोड तक चार सौ मीटर के दायरे में भूमिगत केबल बिछाने का काम गत दो साल से अटका हुआ है। पहले तो केबल बिछाने वाली निजी फर्म ने देरी कर दी और अब सड़क खुदाई का मामला मॉनिटरिंग कमेटी में अटका हुआ है। जल्दी ही यह केबल नहीं डाली गई तो इसका सीधा असर आधे शहर की बिजली आपूर्ति पर पड़ेगा।
पहले धीमा काम, फिर फर्म गायब
प्रतापनगर में 74 करोड़ रुपए की लागत से जीएसएस बनाने व भूमिगत केबल बिछाने के लिए ईपीआईएल कंपनी को ठेका दिया गया था। चौहाबो 132 केवी जीएसएस से प्रतापनगर जीएसएस तक पांच किमी की भूमिगत केबल बिछाने के काम में देरी हुई। पाल लिंक रोड स्थित घड़ी तिराहे से सेंट्रल एकेडमी स्कूल तक चार सौ मीटर तक खुदाई तो गई, लेकिन केबल नहीं डाली। इस पर जेडीए ने सड़क बना दी।
मॉनिटरिंग कमेटी ने रोकी अनुमति
साल भर बाद प्रसारण निगम इस फर्म को ढूंढ़कर वापस लाया और काम शुरू कराया। अब सेंट्रल एकेडमी स्कूल से पाल लिंक रोड तक सड़क खुदाई के लिए अनुमति मांगी। इस पर जेडीए ने दुबारा सड़क खुदाई की अनुमति देने से मना कर दिया। जेडीए का कहना है कि अब मॉनिटरिंग कमेटी ही सड़क खोदने की अनुमति देगी। इसलिए यह मामला मॉनिटरिंग कमेटी में लंबित है।
कभी भी ठप हो सकता है जीएसएस
चौहाबो स्थित 132 केवी जीएसएस पर करीब आधे शहर का दबाव है। इससे चौहाबो के अलावा प्रतापनगर व सूरसागर तक का क्षेत्र जुड़ा है। यह क्षेत्र अन्य किसी जीएसएस से इंटरकनेक्ट नहीं होने के कारण कभी बिजली गुल होते ही कोई विकल्प ही नहीं बचेगा।
लिखित में प्लान मिलने पर ही देंगे सड़क खोदने की अनुमति
केबल डालने में पहले ही देरी हो चुकी है। अब प्रसारण निगम को यह निर्देश दिए गए हैं कि खुदाई करने पर जनता को असुविधा नहीं हो, कम से कम जगह खुदाई की जाए। काम कितने दिन में पूरा होगा, इसका लिखित में प्लान मिलने के बाद ही सड़क खोदने की अनुमति दी जाएगी।
गौरव गोयल, कलेक्टर व अध्यक्ष मॉनिटरिंग कमेटी
मॉनिटरिंग कमेटी से अनुमति लेने को कहा है
सेंट्रल एकेडमी स्कूल से पाल लिंक रोड तक केबल डालने के लिए चार सौ मीटर के दायरे में सड़क खुदाई के लिए अनुमति मांगी गई है। जेडीए ने मॉनिटरिंग कमेटी से अनुमति लेने को कहा है। इसमें देरी होने पर आधे शहर की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
एमसी पुरोहित, एसई, राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम
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