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आफरी में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन
जोधपुर. आफरी में वन विज्ञान केंद्र, बीकानेर व प्रदर्शन ग्राम सालावास, जोधपुर के किसानों और प्रायोगिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण का समापन गुरुवार को हुआ। समापन समारोह में मुख्य वन संरक्षक ((वन्य जीव)), जोधपुर डॉ. गोविंद सागर भारद्वाज ने कहा कि वन्य जीवों को भी वृक्ष एवं अन्य पादपों की तरह संरक्षित कर मरु क्षेत्र के परितंत्र को मजबूत किया जा सकता है। डॉ. भारद्वाज ने गोडावन व अन्य स्थानीय वन्य प्राणियों के संरक्षण पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के तीसरे व अंतिम दिन आफरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीके मिश्रा ने वानिकी प्रजातियों में बीजों की गुणवत्ता पर, डॉ. रंजना आर्या ने शुष्क क्षेत्रों में वन चारागाह मॉडल पर, प्रवीण चव्हाण ने वानिकी प्रजातियों में सीपीटी के चयन पर तथा डॉ. एनके बोहरा ने मरु क्षेत्र पर औषधीय पौधों द्वारा सतत विकास पर व्याख्यान दिया। आफरी निदेशक डॉ. टीएस राठौड़ ने पौधरोपण, मृदा एवं जल संरक्षण पर चर्चा कर जानकारियां दीं। समूह समन्वयक ((शोध)) मानाराम बालोच ने प्रशिक्षणार्थियों से फीडबैक पर चर्चा की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में रतनाराम लोहरा, महिपाल विश्नोई, रणबीरसिंह, ज्योतिप्रकाश व तेजाराम ने सहयोग किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए गए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बिलास सिंह ने दिया।
पुष्प भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया गया।
गोडावन सहित वन्य प्राणियों के संरक्षण पर दिया जोर