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- हाईकोर्ट ने कहा परसराम विश्नोई व ओमप्रकाश के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी चलाया जाए
हाईकोर्ट ने कहा- परसराम विश्नोई व ओमप्रकाश के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी चलाया जाए
जोधपुर - राजस्थान हाईकोर्ट ने एएनएम भंवरी के अपहरण व हत्या के मामले में आरोपी परसराम विश्नोई व ओमप्रकाश विश्नोई पर भी अपहरण व हत्या का मुकदमा चलाने के लिए कहा है। न्यायाधीश अतुल कुमार जैन ने यह आदेश गुरुवार को सीबीआई की ओर से दायर याचिका को आंशिक तौर पर स्वीकार करते हुए दिए। सीबीआई ने यह याचिका अजा-जजा मामलात की विशेष अदालत के 4 अक्टूबर 2012 के उस फैसले के खिलाफ दायर की थी जिसमें विशेष अदालत के तत्कालीन न्यायाधीश गिरीश कुमार शर्मा ने यह कहते हुए दोनों आरोपियों को भंवरी के अपहरण व हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया था कि उनके खिलाफ अपहरण व हत्या के षडय़ंत्र में शरीक होने के कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। उसके बाद से दोनों जमानत पर रिहा चल रहे हैं। गौरतलब है कि परसराम इस मामले में मुख्य आरोपी पूर्व लूणी विधायक मलखानसिंह विश्नोई का छोटा भाई है। शेष पेज - 1२
नहीं चलेगा एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा :
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अपराध इस कारण नहीं किया गया कि भंवरी एससी वर्ग की थी। इसलिए अधीनस्थ अदालत ने एससी-एसटी एक्ट की धारा 3((2))((5)) के तहत जो आरोप सुनाए हैं, वे गलत हैं। यानी अब इस एक्ट के तहत आरोप नहीं रहेगा।
आरोपियों की याचिकाएं खारिज :
इस मामले में अन्य आरोपी दिनेश, पुखराज, रेशमाराम, भंवरी के पति अमरचंद, बिशनाराम, कैलाश जाखड़, अशोक ने भी अधीनस्थ अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देकर कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए अपहरण, हत्या व साजिश रचने के आरोप गलत हैं। इसलिए उन्हें आरोपमुक्त किया जाए, लेकिन हाईकोर्ट ने इनकी याचिकाएं खारिज कर दी। गौरतलब है कि अधीनस्थ अदालत ने अमरचंद पर हत्या का आरोप तय नहीं किया था, उस पर अपहरण की साजिश रचने का ही आरोप तय किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि यह आरोप सही है।
मलखान की याचिका को अलग किया:
हाईकोर्ट ने पहले सभी 7 निगरानी याचिकाओं को एक साथ जोड़ कर सुनवाई की थी। इन पर फैसला 18 दिसंबर 2013 को सुरक्षित रख लिया था, लेकिन मलखान के वकील का कहना था कि उन्हें और बहस करनी है। इस पर हाईकोर्ट ने मलखान की याचिका को अलग कर दिया था, जो अभी भी विचाराधीन है। इसमें कहा गया कि उन पर अपहरण, हत्या व एससी-एसटी एक्ट के तहत लगाए गए आरोप गलत हैं।
कब क्या हुआ :
1 सितंबर 2011 को भंवरी का अपहरण कर हत्या कर दी गई।
11 अक्टूबर 2011 को सीबीआई दिल्ली ने प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया।
21 अप्रैल 2012 को सीबीआई ने पूर्व केबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा, पूर्व विधायक मलखानसिंह विश्नोई, उनके भाई परसराम विश्नोई, बहिन इंद्रा विश्नोई सहित 17 आरोपियों के खिलाफ भंवरी के अपहरण, हत्या, साजिश, सबूत नष्ट करने व एससी-एसटी एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की।
14 मई 2012 को सीबीआई ने अजा-जजा मामलात की विशेष अदालत में चार्ज बहस शुरू की।
4 अक्टूबर 2012 को विशेष अदालत ने मदेरणा व मलखान सहित 13 आरोपियों को अपहरण, हत्या, साजिश, एससी एक्ट के तहत आरोप सुनाए, लेकिन परसराम व ओमप्रकाश को अपहरण व हत्या के आरोप से मुक्त कर मात्र अपराध घटित होने की सूचना नहीं देने व सबूत नष्ट करने के ही आरोप तय किए। ये दोनों अपराध जमानती थे, इसलिए अदालत ने दोनों को उसी दिन जमानत पर रिहा कर दिया।
15 दिसंबर 2012 को सीबीआई ने विशेष अदालत द्वारा तय आरोपों को हाईकोर्ट में निगरानी याचिका पेश कर चुनौती दी।
30 जनवरी 2014 को हाईकोर्ट ने निगरानी याचिकाओं का फैसला कर आरोपी परसराम व ओमप्रकाश के विरुद्ध अपहरण, हत्या व साजिश के आरोप में मुकदमा चलाने का आदेश दिया।