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‘अहंकारी का हमेशा नाश होता है’

8 वर्ष पहले
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कोटा-!- टीलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि जीवात्मा का परमात्मा से मिलन ही रास है। अनंत गोपियां महारास में शामिल होती हंै। रास की कथा सुनने से भगवान की प्रेम भक्ति प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि अहंकार इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है, उन्होंने कंस और रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि अहंकारियों का हमेशा नाश हुआ है। ऐसे में हमें दूसरों के प्रति सहानभुति का भाव रखना चाहिए। महाराज ने उपस्थित माता-पिता से कहा कि हम दूसरे कामों में उलझे रहते हैं, अपने बच्चों पर ध्यान नहीं रख पाते हैं। जिसके दुष्परिणाम बाद में दिखते हैं। हर मां-बाप को अपनी संतान के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। अगर वह गलत करता है तो उसे समझाया जा सकता है। समय निकलने के बाद कुछ भी नहीं होगा। कथा के दौरान संगीतमयी भजनों पर महिलाएं और पुरुष भक्त नाच उठे। रुक्मणि विवाह की मनोहर झांकी सजाई गई। कथा की बुधवार को पूर्णाहुति होगी।
मुक्ति के लिए दीक्षा जरूरी
महावीर नगर विस्तार योजना स्थित नंदवाना समाज भवन में चल ही संगीतमय शिवमहापुराण कथा में द्वादश ज्योर्तिलिंगों प्रसंग प्रसंग हुआ। कथावाचक संत राघव ऋषि ने कहा कि जीवन में मुक्ति के लिए दीक्षा लेना बेहद जरूरी है। रोजाना सुबह 15 मिनट का ध्यान प्रभु के चरणों में लगाएं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा धन साधना है। जो आराधना न करके भी यदि साधन पा रहे है तो उन्हें यह जान लेना चाहिए कि उनके पूर्व जन्म का फल है।