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कहीं गिट्टी का भी हाल बजरी जैसा न हो जाए!

8 वर्ष पहले
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कोटा. क्रेशर उद्योग की मुश्किलें अभी खत्म होने वाली नहीं। दरअसल, बजरी संकट से क्रेशर उद्योग भी मंद पड़ गया था, क्योंकि बिना बजरी के गिट्टी का क्या काम। निर्माण कार्यों में हो रही देरी और परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने 82 ठेकेदारों को बजरी खनन के लिए अधिकृत किया तो गिट्टी की भी खरीद शुरू हो गई और क्रेशर उद्योग को थोड़ी बहुत राहत मिलने लगी। लेकिन, अब क्रेशर उद्योग पर नए कानून से संकट गहरा गया है।

एनवायरमेंट क्लियरेंस के बिना खनन नहीं होगा। इससे क्रेशर उद्योग ही नहीं, पूरा स्टोन उद्योग ही चलाना मुश्किल हो जाएगा और इस बात की भी आशंका जाहिर की जा रही है कि बजरी के बाद अब गिट्टी भी महंगी हो सकती है।माइनिंग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि उद्यमियों को इसके लिए जयपुर और दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ेंगे। एनवायरमेंट क्लियरेंस का कानून राजस्थान में 24 अक्टूबर 2013 से प्रभावी हुआ है।

इसकी जानकारी उन्हें तब मिली जब वह लीज के लिए माइनिंग अधिकारियों से मिले। पहले एनवायरमेंट क्लियरेंस की जरूरत नहीं थी। चेचट माइंस एसोसिएशन के अध्यक्ष सरबजीत सिंह आनंद ने बताया कि केन्द्र सरकार ने 9 सितंबर 2013 को इस मामले में नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बाद राजस्थान सरकार ने अपना कानून लागू कर दिया। नए आदेश के बाद खाने बंद होने की नौबत आ गई है। क्योंकि एनवायरमेंट क्लियरेंस के लिए छह महीने पहले आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद भी सालों गुजर जाते हैं। पैसे की बर्बादी अलग। उन्होंने बताया कि सरकार के इस आदेश से अवैध खनन बढ़ेगा।

क्रेशर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद पालीवाल ने बताया कि कहीं ऐसा न हो नए आदेश से गिट्टी एवं खनन संबंधी अन्य उत्पादों की कीमतें कई गुना बढ़ जाएं। फिलहाल तो यह उद्योग बजरी के कारण पहले ही मंदा चल रहा है। वरना अभी तक गिट्टी की कीमतें बढ़ चुकी होतीं।

पहले क्या थे नियम- राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी क्षेत्रीय अधिकारी राजीव पारीक ने बताया कि पहले पांच हैक्टेयर तक एनवायरमेंट क्लियरेंस की जरूरत नहीं थी। अब चाहे एक हेक्टेयर हो या इससे अधिक सभी के लिए एनवायरमेंट क्लियरेंस जरूरी होगी। करीब 80 फीसदी माइंस पांच हेक्टेयर से अधिक की होती हैं।

क्या है नया आदेश- खान अभियंता एसबी सक्सेना ने बताया कि नए आदेश के तहत किसी भी प्रकार की माइनिंग के लिए पहले एनवायरमेंट क्लियरेंस लानी होगी। इसके बाद ही उद्यमी को खान ग्रांट होगी। इसमें दो श्रेणी बनाई गई है। ‘बी’ श्रेणी के लिए जयपुर और ‘ए’ श्रेणी के लिए दिल्ली से एनवायरमेंट क्लियरेंस लानी होगी।