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कभी इतने शेर कि बांट देते थे और आज खुद मांगने को मजबूर

8 वर्ष पहले
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कोटा। एशियाई शेरों की दहाड़ से गूंजने वाले कोटा चिडिय़ाघर में अब सिर्फ एक शेरनी ‘गौरी’ ही रह गई है। मंगलवार को रतनसिंह की मौत के बाद वह अकेली पड़ गई है। विभागीय अफसरों की अनदेखी के चलते इस वयस्क शेरनी का जोड़ा नहीं बन पा रहा है। वन्यजीव विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को लेकर जरा भी गंभीर नहीं हैं।

जबकि, एक समय इसी चिडिय़ाघर ने कई प्रदेश समेत पड़ोसी राज्यों के चिडिय़ाघर को बब्बर शेर दिए। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि आने वाले समय में यदि गौरी के जोड़े के लिए प्रयास नहीं हुए तो शहरवासियों को बब्बर शेर यहां देखने को नहीं मिलेंगे। उल्लेखनीय है कि 2004 में यहां छह बब्बर शेरों की दहाड़ गूंजती थी।

कई चिडिय़ाघरों को यहां से मिले शेर

कोटा चिडिय़ाघर से कई चिडिय़ाघरों को बब्बर शेर दिए गए हैं। यहां से लव शेर, शेरनी चंदा को जोधपुर, रीना को जयपुर, भरत को रेस्क्यू सेंटर जयपुर भेजा जा चुका है। इसके अलावा उदयपुर और पीपली, हरियाणा चिडिय़ाघर में भी यहां से शेर भेजे जा चुके हैं।

दिनभर दहाड़े मारती रही गौरी

बुधवार सुबह से ही गौरी रतनसिंह के पिंजरे की तरफ जाकर बार-बार दहाड़े मारती रही। पिंजरे में रखे गट्ठर पर वह गुस्सा उतारती रही। गौरी का इतना आक्रोशित व्यवहार दर्शकों ने पहली बार देखा है।

-चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से गौरी का कुनबा बढ़ाने के लिए नर शेर की मांग की गई है। विभागीय अधिकारियों के निर्देशानुसार ही यह प्रक्रिया हो सकेगी। -राकेश शर्मा, उपवन संरक्षक (वन्यजीव)