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कोर्स में पेटेंट विवरण का चैप्टर होना चाहिए- प्रो. व्यास

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोटा
आईपीआर ((बौद्धिक संपदा अधिकार)) विषय पर साइंस सेंटर में बुधवार को एक दिवसीय पेटेंट अवेयरनेस कार्यशाला हुई। इंजीनियरिंग कॉलेज और साइंस छात्रों को पेटेंट संबंधित प्रक्रिया के बारे में मुख्य अतिथि आरटीयू के कुलपति प्रो. एनएस व्यास ने बताया कि पेटेंट के लिए जरूरी नहीं है कि वो हाइटेक विषय पर हो, वो अपने आसपास के विषयों पर भी काम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कोर्स में इसके लिए चैप्टर होना चाहिए। पेटेंट के लिए हम छोटी-छोटी चीजों को डवलप कर सकते हैं। ट्रांसपोर्टेशन और मेडिसिन सेक्टर में इसकी अधिक संभावनाएं हैं। उदाहरण देते हुए वे बोले कि रेलवे में बार-बार कपलर फैल हो जाते हैं। जो एक चैलेंज है। इसमें नया क्या और क्या काम करना चाहिए। इस पर काम किया जा सकता है।
कोटा यूनिवर्सिटी के नोडल अधिकारी प्रो. राजीव जैन ने कहा कि आज चिंता है कि कोई भी युवा अच्छी किताब पढऩा नहीं चाहता है, जबकि अच्छे नोट्स चाहता है। आने वाला समय युवाओं का है। युवा शक्ति सबसे बड़ी ताकत है। चीन ने हमें यह दिखा दिया है। आईपीआर अटॉर्नी विकास आशावत ने कहा कि पेटेंट 20 साल के लिए होता है। इसमें एरिया निर्धारित होता है। तीन तरह से पेटेंट किए जा सकते हैं। डाक से लेकर ऑनलाइन भी इसमें आवेदन किया जा सकता है। परियोजना अधिकारी जीएल गर्ग ने बताया कि कार्यशाला में मोटीवेटर दीपाली त्रिपाठी ने जानकारियां दी।
पेटेंट संबंधित मामले होने लगे रजिस्टर्ड
अटॉर्नी आशावत ने कहा कि कोटा संभाग में पेटेंट संबंधित मामले रजिस्टर्ड होने लगे हैं। आर्गेनिक फर्टिलाइजर से लेकर सेप्टिक टेंक, शिक्षण संस्थाओं के अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठानों से ऐसे मामले रजिस्टर्ड होने लगे हैं।