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स्पीड बढ़ाने के लिए पटरी पर हो चुके हैं 1500 धमाके

8 वर्ष पहले
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कोहरे ने ट्रेनों की रफ्तार रोकी हुई है। दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर तो डिस्टेन सिग्नल लगे, जिससे ट्रेन पायलट को रास्ता देखने में आसानी होती है, लेकिन अन्य रूटों पर ट्रेनों का रास्ता दिखाने के लिए अब तक कोटा सेक्शन में 1500 पटाखे चलाए जा चुके हैं। पटाखों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कोटा-रूठियाई और कोटा-चित्तौडग़ढ़ सेक्शन पर हो रहा है।
कोटा-मथुरा सेक्शन में सवाईमाधोपुर के बाद भरतपुर तक, कोटा-नागदा खंड में शामगढ़ व आसपास, कोटा-रूठियाई खंड पर अंता, बारां, कोटा-चित्तौडगढ़ खंड के मांडलगढ़, श्रीनगर, जलंधरी में कोहरे का असर है। लेकिन, ट्रेनों के संचालन के लिए पटाखों का उपयोग मंडल की दोनों ब्रांच लाइनें कोटा-रुठियाई व कोटा-चित्तौडगढ़ खंड में ही हो रहा है। क्योंकि, दोनों खंडों मे डबल डिस्टेन सिग्नल सिस्टम नहीं लगे हैं। जबकि दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग के मथुरा से नागदा तक के सेक्शन में डबल डिस्टेन सिग्नल लगे हैं। इन सेक्शन पर पटाखों का उपयोग नहीं किया जाता।