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कागजी खानापूर्ति बनता जा रहा है सफाई अभियान
भास्कर न्यूज - कोटा
नगर निगम की ओर से शहर में चलाया जा रहा स्वच्छ नगर अभियान अब खानापूर्ति बनता जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी और महापौर जिस जोश से शुरू में इसमें शामिल हो रहे थे, वे अब इससे किनारा करने लगे हैं। दो दिन से कोई भी अधिकारी इस अभियान में नहीं जा रहा। अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल ठेले वालों को हटाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे क्या करें, उनकी कोई सुनता भी नहीं है। जिस अधिकारी को अतिक्रमण हटाने का प्रभारी बनाया हुआ है, वे भी वहां नहीं पहुंच रहे।
राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप शहर में भी सफाई और अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन, दो दिन से जैसे ही शहर में बरसात हुई, अधिकारियों ने घरों से निकलना बंद कर दिया। बुधवार को वार्ड 25, 26, 27, 28, 29 में अभियान चलाया गया। इसमें स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेपी गुप्ता, एईएन सुभाष अग्रवाल, अतिक्रमण विभाग से श्याम शर्मा आदि अपनी टीम के साथ काम कर रहे थे। अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल ट्रैकर से माइक से घोषणा की जा रही थी। सफाई कर्मचारी कचरा एकत्रित करने और उसे उठाने में जुटे हुए थे। अतिक्रमण के नाम पर कुछ ठेलों को वहां से हटाया गया। जब कर्मचारियों से अफसरों और महापौर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे तो दो दिन से नहीं आ रहे। अतिक्रमण के प्रभारी भी नहीं पहुंच रहे। छोटे कर्मचारी जितना हो सकता है कर रहे हैं।
65 टन कचरा उठाने का दावा
अधिकारी नहीं पहुंचे फिर भी निगम ने इन वार्डों से 65 टन कचरा उठाने का दावा किया है। शुक्रवार को वार्ड 35, 36, 37 व 38 में अभियान चलेगा।