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डाउनलोड करेंकोटा। शहर में झूलते तारों को भूमिगत करने का काम बंद हो गया। दरअसल, नगर निगम ने सड़क खोदने को लेकर दो करोड़ रुपये जयपुर डिस्कॉम से मांगा है। इसमें से करीब २८ लाख रुपए जमीन के भीतर तार बिछाने के लिए मांगे जा रहे हैं। बस यही चार्ज न देने को लेकर मामला थम गया। मामले को हल करने के लिए जयपुर स्थित डिस्कॉम मुख्यालय पर भेजा गया है।
केन्द्र सरकार की आरएपीडीआरपी योजना के तहत जयपुर डिस्कॉम ने 252 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। जिससे शहर को झूलते खतरनाक तारों और बिजली चोरी से मुक्त किया जा सके। 14 मार्च तक काम पूरा होने का दावा किया गया। ग्रहण तो तब लगा जब नगर निगम व यूआईटी प्रशासन की आपत्ति पर सारा काम ही रुक गया।
यूआईटी ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं किया, जबकि वहां बिजली विभाग के प्रभारी डिस्कॉम के ही एक्सईएन है। इस मसले को हल करने के लिए अब जयपुर मुख्यालय पर भेजा गया है। यूआईटी डिमांडनोट भी नहीं दे रहा : खुदाई के लिए यूआईटी प्रशासन तो विभाग को डिमांड नोट भी जारी नहीं कर रहा। इसे लेकर यहां के चीफ इंजीनियर व सचिव तक से विभाग के अधिकारियों ने वार्ता की, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
ऐसे फंसा है मामला
- निगम ने एक मीटर सड़क खोदने का एक हजार मांगा।
- 21181 मीटर सड़क खोदना था चिह्नित इलाकों में।
- इंद्राविहार, सिविल लाइंस, छावनी-गुमानपुरा व स्टेशन क्षेत्र में होनी है खुदाई।
-1.84 करोड़ मांगा जा रहा सड़कों की मरम्मत के लिए।
- 27.62 लाख निगम मांग रहा केबलों जमीन के अंदर रखने के लिए।
- जमीन के अंदर तार बिछाने का चार्ज देने के लिए जयपुर डिस्कॉम तैयार नहीं है।
- निगम किस बात को लेकर उक्त चार्ज मांग रहा यह स्पष्ट नहीं।
- काम रुकने से कई जगह केबलें सड़क पर ही पड़ी हैं।
यह है योजना का फायदा
- पूरे शहर में बिजली लाइनों का एक रिंग बनेगा।
- कई प्वाइंट पर ट्रांसफार्मर लगेंगे।
- खराबी आने पर सिर्फ एक लाइन बंद होगी।
- अभी तक फाल्ट वाले इलाके के साथ अन्य लाइनें भी बंद होती हैं। स्थिति समझते ही दूसरे ट्रांसफार्मर से बंद लाइन चालू होगा।
काम बंद फिर भी जैसे-तैसे डाल रहे हैं केबलें
संभागीय आयुक्त के यहां हुई दर तय
-रोड कटिंग व जमीन में केबल रखने की दरें संभागीय आयुक्त ने पिछले साल हुई बैठक में तय की थी। उसके अनुसार दिसंबर में डिमांड नोट डिस्कॉम को दिया गया। वे पैसा जमा कराकर काम कर सकते हैं। रोड कटिंग चार्ज सिर्फ डिस्कॉम से ही नहीं बल्कि संचार निगम व निजी संस्थाओं से भी ली गई है। -दिनेश जैन, सीईओ नगर निगम
सचिव देते हैं अनुमति
-रोड कटिंग की अनुमति सचिव देंते हैं। उनसे दो बार आग्रह किया जा चुका है। मेरा काम यूआईटी में काम देखना है। मैं अनुमति दिला सकता हूं यह कहना गलत है। -मुकेश गर्ग, एक्सईएन बिजली विंग यूआईटी
एक साल पिछड़ेगा काम
-समय पर अनुमति नहीं मिलने से केबल बिछाने का काम एक साल पिछड़ेगा। इससे उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधा में भी देरी होगी।-क्षेमराज मीणा, एसई जयपुर डिस्कॉम
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