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डाउनलोड करेंकोटा। देशभर से छात्राएं कोटा पढ़ाई के लिए आती हैं। वो हॉस्टल से लेकर रूम किराए पर लेकर रहती हैं, लेकिन सेहत पर ध्यान नहीं दे पाती हैं। परिवार से दूर रहती हैं। बेझिझक फास्टफूड खाने और टेंशन के चलते इनका वजन दो से पांच किलो तक घट जाता है।
यह निष्कर्ष होमसाइंस में रिसर्च स्टडी करने वाली रिसर्चर अंजली सक्सेना ने पायलेट प्रोजेक्ट में 100 छात्राओं पर की स्टडी पर निकाला। जेडीबी कॉलेज में शिक्षा निदेशालय की ओर से आयोजित सेंटर फॉर एक्सीलेंस ((मॉडल कॉलेज योजना)) में रिसर्च पत्र में यह बात बताई। होमसाइंस विभाग की डॉ. बिंदु चतुर्वेदी की देखरेख में रिसर्च कर रही अंजली ने बताया कि परिवार से दूर रहने के कारण घर जैसा खाना नहीं मिलता है। मैस का खाना भी न्यूट्रीशियन वाला नहीं मिल पाता है। जिससे छात्राएं बीमार हो जाती हैं। डिप्रेशन, पढ़ाई की टेंशन, घर-परिवार से दूरी के चलते वजन में कमी आ जाती है। उन्होंने बताया कि अब वे 1200 छात्राओं पर काम करेंगी।
रिसर्च संगोष्ठी में मधुलिका शर्मा ने सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य की योजना के बारे में बताया। अनुराधा गौतम ने मनरेगा से सहरिया जनजाति की इनकम पर हुए परिवर्तन पर फोकस किया। कला में 23, साइंस में 5 और कॉमर्स में 2 स्कॉलर ने शोध संबंधित जानकारियां समझाई। संगोष्ठी में कोटा यूनिवर्सिटी के रिसर्च डायरेक्टर प्रो. एससी राजौरा ने रिसर्च में स्किल डवलपमेंट पर बल दिया। कोटा यूनिवर्सिटी में साइंस विभाग की डीन प्रो. आशुरानी ने रिसर्च में गहन अध्ययन के बारे में बताया। डीन प्रो. राजीव जैन ने नए रिसर्च पर फोकस किया।
फ्लाईऐश स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
प्रिंसिपल प्रो. हरिसिंह मीणा ने भी संबोधित किया। यूजीसी प्रभारी डॉ. संध्या गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. सुषमा आहूजा, डॉ. साधना सैनी, अरुणा कौशिक सहित अन्य गाइड मौजूद रहे। संगोष्ठी संयोजक प्रो. मनोहरलाल गुप्ता ने बताया कि रिसर्च स्कॉलर रेणु हाड़ा ने फ्लाईऐश के नैनो पार्टिकल पर फोकस करते हुए इसे स्वास्थ्य के लिए घातक बताया।
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