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सड़क पर फैली गिट्टियों ने तोड़ दिए दो युवकों के घुटने
भास्कर न्यूज - कोटा
कालाबाजरी के लिए 56 सिलेंडरों के आने की गुरुवार को सूचना मिली तो रसद विभाग ने सिलेंडर जब्त कर लिए और पुलिस ने भी मौके पर मिले तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। लेकिन, शुक्रवार को मामले की जो स्क्रिप्ट लिखी गई, उसे देखकर साफ है कि मुख्य गुनहगार तक पहुंचने से पहले ही सबूत मिटाने का रास्ता साफ हो गया। न तो रसद विभाग ने पुलिस में मामला दर्ज कराया और इसी बहाने पुलिस ने भी तीनों आरोपियों को छोड़ दिया।
घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी कर झालावाड़ से कोटा लाए गए 56 सिलेंडर को गुरुवार को महावीर नगर पुलिस ने बालाजी मार्केट की दुकान नंबर 155 से जब्त किए थे। पुलिस ने सिलेंडर उतरवा रहे राहुल शर्मा, ट्रक चालक कमल सिंह व खलासी किशन सिंह को हिरासत में लिया था। पुलिस गुरुवार और शुक्रवार को दिनभर रिपोर्ट के लिए रसद विभाग के अधिकारियों का इंतजार करती रही। पुलिस ने रसद विभाग के प्रवर्तन अधिकारी पवन अग्रवाल को रिपोर्ट के लिए कहा भी, लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं आई। पुलिस ने भी रिपोर्ट नहीं मिलने का बहाना कर तीनों को छोड़ दिया।
रसद विभाग ने ये भी पता नहीं लगाया कि सिलेंडर किस एजेंसी के थे। केवल इतना ही बताया कि अधिकांश सिलेंडर एचपी के थे और झालावाड़ से आए थे। प्रवर्तन अधिकारी पवन अग्रवाल का कहना है कि जांच के लिए झालावाड़ के डीएसओ को पत्र लिखा जाएगा। हमारे अधिकार क्षेत्र में जो था उसके आधार पर हमने जिला कलेक्टर कोर्ट में पूरे मामले का वाद दायर कर दिया है।
एक्सपर्ट: दोनों करवा सकते थे मामला दर्ज
इस मामले में एडवोकेट रतिंदर कौर का कहना है कि जब सिलेंडर व आरोपी पकड़ लिए गए थे तो जरूरी नहीं है कि पुलिस रसद विभाग की रिपोर्ट का इंतजार करे। पुलिस स्वयं भी खुद की तरफ से एफआईआर दर्ज कर हिरासत में लिए आरोपियों से पूछताछ कर जांच को आगे बढ़ा सकती है। पुलिस इन्वेस्टिगेशन एजेंसी है और ये उसका अधिकार है। रिपोर्ट रसद अधिकारी को भी देनी चाहिए थी। वो आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपनी कार्रवाई करते रहते हैं और आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज करवा देते। दोनों कार्रवाई साथ-साथ चल सकती थी।