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गांवों में कहीं पीने का पानी तो कहीं सड़क और बिजली नहीं

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोटा
पीपल्दा विधायक विद्याशंकर नंदवाना ने शुक्रवार को विधानसभा में गांवों के विकास का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से गांवों के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है, लेकिन अभी भी कई गांवों में पानी, बिजली व सड़कें तक उपलब्ध नहीं हैं।
नंदवाना ने कहा कि एक तरफ तो शहरों में फव्वारे लगाकर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ गांवों के लोगों को आज भी फ्लोराइडयुक्त व नदी का पानी पी रहे हैं। कई गांवों में बिजली तक नहीं पहुंची हैं। उनका आरोप था कि ग्रामीण विकास के नाम पर चलाई जा रही योजनाएं गांवों के विकास के लिए नाकाफी हैं।
खाद्य सुरक्षा से राजस्थान को मुक्त रखें
विधायक भवानीसिंह राजावत ने शून्यकाल में खाद सुरक्षा और मानक अधिनियम और विनियम 2011 से किसानों व व्यापारियों पर होने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि अधिनियम के प्रावधानों की अव्यवहारिकता के चलते मध्यप्रदेश में मंडियां बंद होना प्रारंभ हो गई हैं। महाराष्ट्र, गुजरात में बंद होने की तैयारी में हैं। यदि राजस्थान में भी यह अधिनियम लागू हो गया तो व्यापारियों के पास मंडियों एवं उद्योगों को बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत यदि कृषि जिंसों का क्रय, विक्रय, भंडारण पैकेजिंग, प्रोसेसिंग व परिवहन करने वाले व्यापारियों ने 4 फरवरी तक लाइसेंस नहीं लिया तो उन्हें 6 माह कारावास एवं 5 लाख जुर्माना भुगतना होगा।
तीन किमी दूर से लाना पड़ता है पानी
विधायक चन्द्रकांता मेघवाल ने शून्यकाल में रामगंजमण्डी क्षेत्र की पेयजल की समस्या की ओर सरकार का ध्यान दिलाया। उनका कहना था कि कई कॉलोनियों में आधे घंटे ही पानी आता है, कई क्षेत्रों में लोगों को तीन-तीन किमी दूर से पीने का पानी लाना पड़ता है। सरकार ने पचपहाड़ पेयजल योजना, रावतभाटा रामगंजमण्डी पेयजल योजना व अकेलगढ़ बोराबास पदमपुरा पेयजल योजना स्वीकृत की थी। जिसमें पचपहाड़ व रावतभाटा का कार्य पूर्ण हो गया था, लेकिन इन दोनों योजनाओं से आवश्यकतानुसार पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनका आरोप था कि ये दोनो योजनाएं फैल हो चुकी हैं। इसी प्रकार बोराबास, पदमपुरा, योजना का कार्य वन विभाग की आपत्तियों के कारण काफी धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने कोटा की करीब एक दर्जन कॉलोनियों का मामला भी उठाया।



तीन किमी दूर से लाना पड़ता है पानी

विधायक चन्द्रकांता मेघवाल ने शून्यकाल में रामगंजमण्डी क्षेत्र की पेयजल की समस्या की ओर सरकार का ध्यान दिलाया। उनका कहना था कि कई कॉलोनियों में आधे घंटे ही पानी आता है, कई क्षेत्रों में लोगों को तीन-तीन किमी दूर से पीने का पानी लाना पड़ता है। सरकार ने पचपहाड़ पेयजल योजना, रावतभाटा रामगंजमण्डी पेयजल योजना व अकेलगढ़ बोराबास पदमपुरा पेयजल योजना स्वीकृत की थी। जिसमें पचपहाड़ व रावतभाटा का कार्य पूर्ण हो गया था, लेकिन इन दोनों योजनाओं से आवश्यकतानुसार पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनका आरोप था कि ये दोनो योजनाएं फैल हो चुकी हैं। इसी प्रकार बोराबास, पदमपुरा, योजना का कार्य वन विभाग की आपत्तियों के कारण काफी धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने कोटा की करीब एक दर्जन कॉलोनियों का मामला भी उठाया।

खाद्य सुरक्षा से राजस्थान को मुक्त रखें

विधायक भवानीसिंह राजावत ने शून्यकाल में खाद सुरक्षा और मानक अधिनियम और विनियम 2011 से किसानों व व्यापारियों पर होने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि अधिनियम के प्रावधानों की अव्यवहारिकता के चलते मध्यप्रदेश में मंडियां बंद होना प्रारंभ हो गई हैं। महाराष्ट्र, गुजरात में बंद होने की तैयारी में हैं। यदि राजस्थान में भी यह अधिनियम लागू हो गया तो व्यापारियों के पास मंडियों एवं उद्योगों को बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत यदि कृषि जिंसों का क्रय, विक्रय, भंडारण पैकेजिंग, प्रोसेसिंग व परिवहन करने वाले व्यापारियों ने 4 फरवरी तक लाइसेंस नहीं लिया तो उन्हें 6 माह कारावास एवं 5 लाख जुर्माना भुगतना होगा।