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डाउनलोड करेंकोटा। कोटागण ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है। यहां का गण राजतंत्र के कितना खिलाफ है। इसीलिए तो यातायात विभाग आज तक नागरिक की ताजपोशी (हेलमेट-मुकुट) नहीं कर पाया। जोर-जबरदस्ती या चालान काट कर यदि पुलिस ने ताजपोशी कर भी दी तो विरोध इतना प्रबल है कि पुलिस के हटते ही मुकुट उतार दिया जाता है। कोटा गण को पता है कि देश के विकास हेतु गति की बहुत जरूरत है। इसलिए व्यस्त गलियों में इतनी तेज गति से वाहन चलाता है कि माइकल शूमाकर भी शर्मा जाए।
बच्चा गर्भ में ही जान लेता है आईआईटी
सामान्यत: मनुष्य के जीवन की तीन अवस्थाएं होती हैं। बचपन, युवावस्था व बुढ़ापा। कोटा गणतंत्र में दो ही अवस्थाएं पाई जाती हैं। युवावस्था और बुढ़ापा। यहां के लोकल गणतंत्र में बचपन की व्यवस्था ही नहीं है। शिक्षा नगरी में बच्चों के सिर पर अघोषित परंपरा पैदा होते ही लाद दी जाती है कि वह अभिमन्यु की तरह गर्भ में ही ज्ञान ले लेता है- वह दुनिया में आईआईटी जेईई या फिर मेडिकल करने आया है। जन्म से पूर्व ही इस बात को जान ले लेता है कि वह बड़ा होकर कौनसी तक्षशिला या नालंदा फैकल्टी में जाने वाला है।
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