देश में अव्वल, फिर भी नहीं छू पाए शील्ड
भास्कर न्यूज - कोटा
मतदान वृद्धि को लेकर देश में अव्वल आने के बावजूद कोटा के दो अधिकारी अधिकार से वंचित रह गए। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान के हकदार कलेक्टर शील्ड को छू भी नहीं पाए और नोडल अधिकारी को तो सम्मान लेने के लिए बुलाया भी नहीं। जबकि दूसरे दो जिलों के नोडल अधिकारियों को सम्मान दिया गया।
वोटिंग बढ़ाने को लेकर विधानसभा चुनावों में पूरे देश में कोटा पहले नंबर पर आया था। इस पर कोटा कलेक्टर जोगाराम को 26 जनवरी पर राष्ट्रपति ने सम्मान के लिए बुलाया था। लेकिन, राज्य के हिस्से का पुरस्कार लेने गए मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक जैन ने कोटा कलेक्टर के हिस्से का पुरस्कार भी ले लिया। जयपुर में सम्मान प्राप्त करने के बाद जोगाराम को दिल्ली जाने की बजाय कोटा आकर गणतंत्र दिवस की तैयारियां करने के लिए कह दिया गया।
मैंने आपत्ति दर्ज करवा दी है
॥मैंने महिला एवं बाल कल्याण विकास विभाग में उपनिदेशक के रूप में कार्य करते हुए चुनाव में भी नोडल अधिकारी का काम किया था। पहला स्थान आने पर पुरस्कार के लिए चयनित चार जनों की सूची में मेरा नाम भी शामिल था। 25 जनवरी को जयपुर में जब अन्य ने पुरस्कार प्राप्त किया तो मुझे आश्चर्य हुआ। मेरा नाम कैसे नहीं भेजा, यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन की थी। मैंने एडीएम व सीईओ जिला परिषद को आपत्ति दर्ज करा दी है। -महेन्द्र कुमार शर्मा, प्रोग्राम अधिकारी महिला अधिकारिता
नाम नहीं भेजे, प्रस्ताव भेजा था
॥कोटा जिले से अधिक मतदान कराने का प्रस्ताव ही निर्वाचन विभाग को भेजा गया था, किसी का नाम इसमें नहीं भेजा। इसमें तीन ही नाम कैसे आए, चौथे अधिकारी का नाम शामिल क्यों नहीं किया गया, इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मुझे यह भी पता नहीं कि अन्य स्थानों से नोडल अधिकारी आए थे या नहीं। जहां तक दिल्ली में पुरस्कार लेने की बात है तो वह मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ले लिया। कोटा में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियां करनी थीं, इसलिए मैं जयपुर से लौट आया। -जोगाराम कलेक्टर, कोटा
दूसरे, तीसरे स्थान वाले पहुंचे, पहले स्थान वाले नोडल अधिकारी नहीं
प्रदेश स्तर पर प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित होने वालों में चार अधिकारी शामिल थे। इसमें जिला निर्वाचन अधिकारी जोगाराम, उपजिला निर्वाचन अधिकारी सूरजभान जैमन, सीईओ जिला परिषद पीसी पवन तथा स्वीप नोडल अधिकारी महेन्द्र कुमार शर्मा शामिल थे। 25 जनवरी को जयपुर में सम्मान के लिए कोटा से केवल 3 अधिकारी ही पहुंचे। महेन्द्र शर्मा को इससे वंचित कर दिया गया, जबकि दूसरे व तीसरे स्थान पर रहने वाले गंगानगर तथा जोधपुर से नोडल अधिकारी भी आए थे। शर्मा का कहना है कि इससे उन्हें काफी अफसोस हुआ है। लगता है प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका नाम ही नहीं भेजा। यही नहीं उनकी इतनी उपेक्षा की गई कि गणतंत्र दिवस पर स्थानीय समारोह में भी उन्हें सम्मानित नहीं किया गया।