एक मुसलमान को जीतने नहीं देते: पठान
भास्कर न्यूज - कोटा
कांग्रेस कार्यालय में सोमवार को हुई बैठक में मुद्दे पर केवल 5 मिनट बात हुई और 45 मिनट तक विधानसभा चुनावों में हार को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। लाडपुरा क्षेत्र से प्रत्याशी नईमुद्दीन गुड्डू समर्थकों ने प्रदेश और शहर प्रभारी सचिव मुकेश शर्मा को खूब खरी-खोटी सुनाई। आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों और एसटी-एससी समुदाय की उपेक्षा के कारण पार्टी की हार हुई। गरमागरमी इतनी ज्यादा हो गई कि सचिव के साथ गाली-गलौज तक कर दी। बाद में मान मनौव्वल पर कार्यकर्ता शांत हुए। मीटिंग जयपुर में पार्षदों और जिला परिषद सदस्यों की 29 व 30 जनवरी को होने वाली बैठक के लिए बुलाई गई थी।
बैठक के शुरू में ही पहुंचे पूर्व पार्षद चंद्रदीप आमेरा को समर्थकों के साथ मीटिंग हॉल से बाहर निकाला तो आमेरा हॉल के दरवाजे पर धरने पर बैठ गए और जोर-जोर से बोलने लगे कि बंद कमरे में कांग्रेस नहीं चलेगी। कांग्रेस को प्राइवेट लिमिटेड मत बनाओ। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा भी यहां मौजूद थे। बैठक खत्म होते ही जिला सचिव आबिद कुरैशी, पार्षद शरीफ पठान, जिला परिषद सदस्य नईमुद्दीन गुड्डू व अन्य कांग्रेसजन हॉल में पहुंचे। कुरैशी ने शर्मा से चिल्लाते हुए कहा कि आप प्रभारी सचिव हैं, नैतिकता के नाते इस्तीफा दें।
फरवरी में हो सकती है प्रत्याशियों की घोषणा
प्रभारी सचिव ने कहा कि फरवरी में राज्य की अधिकतर सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। संगठन में बदलाव को उन्होंने नकार दिया, हालांकि कहा कि जरूरत हुआ तो बदलाव जरूर किए जाएंगे।
क्यों हुआ हंगामा
कांग्रेस कार्यालय में डीसीसी पदाधिकारियों व पार्षदों की बैठक बंद कमरे में करने से कांग्रेसियों का गुस्सा बढ़ गया और पूर्व पार्षद चन्द्र दीप आमेरा परिसर में ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद अल्पसंख्यकों और एसटी-एससी की उपेक्षा करने को लेकर जिला सचिव आबिद कुरैशी, पार्षद शरीफ पठान व जिला परिषद सदस्य नईमुद्दीन गुड्डू ने प्रभारी सचिव पंडित मुकेश शर्मा को खरी-खोटी सुनाई।
कौन क्यों था निशाने पर
जिले की सभी 6 सीटों पर कांग्रेस की हार को लेकर कांग्रेसी प्रभारी सचिव मुकेश शर्मा को जिम्मेदार बता रहे थे। पार्टी के बड़े नेताओं को लेकर भी गुस्सा था। साथ ही मुसलमान प्रत्याशी के चुनाव नहीं जीत पाने से भी गुस्से में थे।
कोई बड़ा नेता नहीं आया
बैठक में कोई भी बड़ा नेता नहीं पहुंचा। सांसद इज्यराज सिंह, पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, महापौर डॉ. रत्ना जैन, उपमहापौर राकेश सोरल भी बैठक में नहीं आए।
क्या होगा असर भविष्य पर
जिस प्रकार से हंगामा हुआ और दबाव बनाया जा रहा है, उसके पीछे आने वाले लोकसभा चुनावों के साथ ही स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव भी हैं। विधानसभा में हार के बावजूद ढांचागत बदलाव न करने से कार्यकर्ताओं में रोष है। चुनाव में खिलाफत करने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से भी कांग्रेसी नाराज हैं। ऐसे में केवल 3 महीने में पूरी पार्टी को फिर से खड़ा करना चुनौती होगी, जिसका विपक्षी पार्टियों को फायदा मिल सकता है। हार के बाद कोटा की कांग्रेस कई धड़ों में बंट गई है। यह जातिगत आधार पर भी बंटी है और बड़े नेताओं के भी गुट बन गए हैं। संगठन के साथ ही बड़े नेताओं को लेकर ठोस रणनीति नहीं बनाई गई तो सोमवार को हुए हंगामे का असर लोकसभा चुनावों पर दिख सकता है।
पार्टी को जिंदा रखना है, तो साम्प्रदायिक लोगों को हटाओ, विरोध में काम करने वालों को हटाओ
पार्षद शरीफ पठान ने सचिव शर्मा से कहा कि रवींद्र त्यागी, कालू मलकानी, देवेश तिवारी को पार्टी से निकालो। कालू मलकानी और देवेश तिवारी ने पार्टी के विरोध में काम किया है। कहा कि क्या, अल्पसंख्यक व एससी, एसटी का कोई नहीं दिखा यूआईटी चेयरमैन बनाने के लिए? पार्टी को जिन्दा रखना है तो साम्प्रदायिक लोगों को हटाओ। सचिव ने गुड्डू, कुरैशी, पठान और क्रांति तिवारी को कहा कि प्रदेशाध्यक्ष पायलट को शिकायत करो, मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा।
जो कभी पार्षद का चुनाव भी नहीं जीता, उसे यूआईटी का चेयरमैन बना दिया
पार्षद शरीफ पठान ने सचिव शर्मा को कहा कि जो पार्षद का चुनाव नहीं जीता उसे यूआईटी चेयरमैन बना दिया। अल्पसंख्यक व एससी, एसटी से जुड़े लोगों को जब-जब कांग्रेस ने दरकिनार किया है, कांग्रेस पिछड़ी है। नईमुद्दीन गुड्डू ने कहा कि जब तक विरोधियों पर सख्ती नहीं होगी, सुधार नहीं हो सकता। इस पर प्रभारी सचिव ने कहा कि जिसको शिकायत है, वो जयपुर आकर सचिन पायलट को बताएं।
देखो, बिरला के वार्ड से जिता लाया
बीच में मत बोलो, पूरी बात करने दो
बैठक - अल्पसंख्यकों और एसटी-एससी की उपेक्षा से गुस्साए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सचिव मुकेश शर्मा से गाली-गालौच तक कर दी, पार्षदों और जिला परिषद सदस्यों की बैठक के लिए बुलावा देने आए थे कोटा, बंद
कमरे में मीटिंग को लेकर भड़के, मुख्य मीटिंग तो ५ मिनट ही चली, बाद में होता रहा हंगामा और मान-मनौव्वल