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सम्मान को ऐसी ठेस लगी कि अफसरी छोड़ फिर से बन गए सब इंसपेक्टर

7 वर्ष पहले
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कोटा. वोटिंग बढ़ाने के मामले में देश में सर्वोच्च आने के बावजूद सम्मान से वंचित रखा तो एक अधिकारी ने नौकरी ही छोड़ दी और अपने पुराने विभाग पुलिस सेवा में पहुंच गए। महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रोग्राम अधिकारी महेन्द्र शर्मा ने नौकरी की शुरुआत पुलिस में सब इंसपेक्टर से की थी। 11 साल सेवा में रहने के दौरान ही उन्होंने वर्ष 2010 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी। इसमें उनका चयन हुआ और महिला एवं बाल विकास विभाग में उपनिदेशक का पद मिला। यहां भी उन्होंने जी तोड़ मेहनत की।

शहर में नए मतदाताओं को जोडऩे के लिए विभाग के उपनिदेशक रहते हुए काम किया। जिले को देश में प्रथम स्थान मिला तो वे भी खुश हुए, लेकिन जब इनाम व प्रशस्ति पत्र लेने की बारी आई तो प्रशासन ने उन्हें अलग कर दिया। उन्हें गणतंत्र दिवस पर भी सम्मानित करना मुनासिब नहीं समझा। वे उपेक्षा से इतने विचलित हुए कि उन्होंने इस सेवा को ही छोड़ दिया और वे अपने पुराने विभाग पुलिस में चले गए।

पुलिस सेवा में वापस जा रहे महेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने फिर से राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी थी, जिसके फाइनल परिणाम सोमवार को आया है। इसके इंटरव्यू फरवरी में हैं। इसमें यदि उन्हें अच्छी ब्रांच मिलती है तो वे फिर इस सेवा में जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे खुलकर काम करने के पक्ष में हैं। इसी कारण उन्होंने पहले पुलिस सेवा ज्वॉइन की थी। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद भी बेहतर काम किया, लेकिन यहां उसका सम्मान नहीं हुआ। इसे सराहा नहीं गया। यहां काम करने में मैं अपनी गति को कम नहीं करना चाहता। इसलिए फिर से पुलिस सेवा में चला गया।

ऐसे जा सकते हैं पुरानी सेवा में

राजस्थान सर्विस रूल्स के नियम 15 के अनुसार एक ही सर्विस के दौरान यदि एक विभाग को छोड़कर कोई व्यक्ति दूसरे विभाग में सेवा शुरू करता है और प्रोबेशन पीरियड के दौरान ही नई नौकरी से पुरानी नौकरी में लौटना चाहे, तो ऐसा कर सकता है।