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झूठे हैं रोडवेज के स्पीड गवर्नर

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोटा
रोडवेज और परिवहन विभाग अब निर्लज्जता पर उतारू हो चुके हैं। दो दिन के भीतर दो मौतें हो चुकी हैं। बावजूद इसके ज्यादातर बसों में अभी भी स्पीड गवर्नर नहीं हैं। रोडवेज बस की टक्कर से सोमवार को देवली में कोटा के व्यापारी कमल निमावत की और मंगलवार को बस की टक्कर से रायपुरा रोड पर महिला की मौत हो गई। इसके बाद बुधवार को भास्कर संवाददाता ने पीछा करके कई बसों की पड़ताल की। जिसमें दो तरह की बातें सामने आईं- पहली, ज्यादातर बसों में स्पीड गवर्नर नहीं लगे थे। दूसरी, जिनमें लगे थे, वे भी 70 से 75 की स्पीड से दौड़ रही हैं। क्यों कि उनके स्पीड मीटर ही खराब हैं।
वाहनों की गति पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग ने केन्द्रीय मोटर यान अधिनियम-1989 के तहत भारी, यात्री एवं लोडिंग वाहनों में ढाई साल पहले स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य किया था। परिवहन विभाग नए वाहन में स्पीड गवर्नर लगवाने के बाद परमिट देता है। वहीं पुराने वाहनों गवर्नर लगने के बाद फिटनेस जारी करता है। भास्कर पहले भी पड़ताल करके बता चुका है कि ज्यादातर रोडवेज बसें बिना स्पीड गवर्नर के दौड़ रही हैं। फिर दोनों विभागों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्पीड गवर्नर के मामले में पहले तो इन विभागों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। अब, जब नियमों के तहत उन्हें लगाना पड़ रहा है तो वे इतने बेपरवाह हैं कि उसकी चेकिंग तक नहीं कर रहे।
वहीं आरटीओ बीएल मीणा का कहना है कि जनरल चैकिंग व विशेष अभियान के दौरान स्पीड गवर्नर लगा नहीं होने पर चालान बनाकर 2 हजार रुपए तक का जुर्माना वसूल किया जाता है। अप्रैल से जनवरी तक 280 चालान बनाए गए। इनमें 10 स्पीड गवर्नर के हैं।