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विधायक के रैन बसेरे पर महापौर को एतराज

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोटा
कोटड़ी रोड पर बन रहे आधुनिक रैन बसेरे का गुरुवार को उद्घाटन होना है, लेकिन उससे पहले ही यह विवादों के घेरे में आ गया। विधायक ओम बिरला द्वारा बनवाए जा रहे इस रैन बसेरे को महापौर डॉ.रत्ना जैन ने स्थानीय लोगों की शिकायत पर अवैध बताया। उन्होंने सीईओ दिनेशचंद जैन को कार्रवाई व नोटिस देने के आदेश दिए हैं। इधर, विधायक का कहना है कि ये रैन बसेरा पोर्टेबल है। सर्दी खत्म होते ही इसे हटा दिया जाएगा। इसके लिए वे कलेक्टर से परमिशन ले चुके हैं। महापौर को जनहित के काम में सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।
कोटड़ी रोड पर कांग्रेस कार्यालय के निकट पिछले कुछ दिनों से विधायक बिरला की पहल पर आधुनिक रैन बसेरे का निर्माण चल रहा है। इसे राज्य में मॉडल रैन बसेरे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके ठीक पीछे व्यापारी मोहित नाहटा का मकान है। नाहटा ने महापौर को आपत्ति दर्ज करवाई कि उनके घर के सामने रैन बसेरा खोलने से न्यूसेंस होगा और हमें परेशानी होगी। निगम इसकी अनुमति नहीं दे।
शिकायत मिलते ही महापौर ने सीईओ जैन को पत्र लिखा कि रैन बसेरे की जमीन व परमिशन की जांच की जाए। सीईओ ने जांच करवाई तो जमीन निगम की पाई गई और इस पर रैन बसेरा बनाने की अनुमति नहीं ली गई। मेयर ने सीईओ को कार्रवाई के आदेश दिए तो सीईओ ने आयुक्त भवानीसिंह पालावत को नोटिस और कार्रवाई करने के आदेश थमा दिए। हालांकि बुधवार शाम तक निगम की ओर से कोई नोटिस नहीं दिया गया।




शिकायत पर दोनों पक्ष पहुंचे

बुधवार शाम को महापौर खुद उस रैन बसेरा देखने पहुंच गई। इसकी भनक लगते ही भाजपा नेता गुड्डू मरचुनिया भी कार्यकर्ताओं के साथ वहां पहुंचे। महापौर का कहना है कि उन्हें वहां कोई भी व्यक्ति काम करते हुए या देखरेख करते हुए नहीं मिला। रैन बसेरे का ढांचा खड़ा हुआ था। वहीं मरचुनिया का कहना है कि वे पहुंचे तो कार्यकर्ताओं को देखकर महापौर वहां से चली गई। विरोध का पता चलते ही वहां कई मजदूर आ गए और रैन बसेरा बनाने के पक्ष में नारेबाजी करने लगे। रात को ही लोग उसमें जाकर सो भी गए। इधर, कांग्रेस प्रदेश सचिव पंकज मेहता ने भी इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सेवा के काम करते हुए दूसरों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।



अब रैन बसेरे का क्या औचित्य

॥रैन बसेरा बनाना ही था तो जब कड़ाके की सर्दी थी तब बनाते। हम से कह दिया होता तो खाली जगह देखकर बना देते। बिना परमिशन के दूसरे के घर के बाहर रैन बसेरा बनाने का क्या औचित्य है। जांच में रैन बसेरा अवैध पाया गया है। मैंने कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं।’ - डॉ. रत्ना जैन, महापौर

स्थायी नहीं पोर्टेबल है रैन बसेरा

॥ये रैन बसेरा पोर्टेबल है और इसे राज्य में मॉडल के रूप में विकसित करेंगे। सर्दी खत्म होते ही ये खुलकर हट जाएगा। महापौर को यह पच नहीं रहा है बल्कि इस मॉडल को दूसरी जगह अपनाना चाहिए। यहां आने वालों को कपड़े और भोजन भी मिलेगा। इसके लिए कलेक्टर से अनुमति ली गई है।’- ओम बिरला, विधायक