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हैंडलूम के नाम पर बिकता है पावरलूम का कपड़ा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज . कोटा
हैंडलूम के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए का पावरलूम से बना कपड़ा बिक जाता है। हैंडलूम के कपड़ों का एक अलग महत्व है। इस पर बन कपड़ों की कीमत भी पावरलूम से बने कपड़ों से ज्यादा है। इसलिए हैंडलूम से निर्मित कपड़ों के संरक्षण के लिए हैंडलूम मार्क जरूरी है।
यह जानकारी महिला पॉलीटेक्निक कॉलेज में टैक्सटाइल डिजायन की छात्राओं को हैंडलूम मार्क पर आयोजित कार्यशाला में वस्त्र समिति जयपुर के उपनिदेशक जीएस पाराशर ने दी। उन्होंने बताया कि हथकरघा उद्योग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 65 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। हैंडलूम से निर्मित कपड़ों के सबसे बड़े आयातक देशों में अमेरिका, कनाड़ा, आस्ट्रेलिया, यूरोप और जापान के नाम शामिल हैं। बुनकर सेवा केन्द्र जयपुर के सहायक निदेशक एसएस खंडारे ने बताया कि केन्द्र वस्त्र नमूने, पेपर डिजायन एवं कई अन्य तकनीकी सहायता जरूरतमंदों को उपलब्ध कराता है। टैक्सटाइल डिजायन की 100 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। क्विज प्रतियोगिता में श्रुति हाड़ा प्रथम रहीं।
मुख्य अतिथि लघु उद्योग काउंसिल के अध्यक्ष ने कहा कि कोटा डोरिया महिला बुनकरों की कला का एक नायाब नमूना है। प्रिंसिपल जेके जैन, नशा मुक्ति संस्थान के डॉ. आरसी साहनी, कॉलेज की टैक्सटाइल इंचार्ज विभा गर्ग ने भी संबोधित किया। ताना-बाना पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से हैंडलूम के बारे में जानकारी दी गई।



क्या है हैंडलूम मार्क