पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंकोटा - आज से 10 साल पहले शहर के अनाथालयों में आने वाले 90 फीसदी निसंतान दंपती बेटा गोद लेना चाहते थे लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है। करणी नगर विकास समिति के आश्रय में पिछले 6 माह में पढ़े-लिखे दंपतियों ने 6 बेटियों को गोद लिया है। फिलहाल 25 दंपती बच्चे गोद लेना चाहते हैं लेकिन पालनाघर में बेटियां नहीं होने से उन्हें एक साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। झुंझनू के एक बिजनेसमैन ने 2 माह की बेटी को गोद लिया है। आश्रय के संचालक महावीर भंडारी ने बताया कि 1979 से अब तक 34 साल में 888 बच्चों को अलग-अलग शहरों के दंपतियों को गोद दिया गया है।
भारत सरकार ने कोटा के आश्रय अनाथालय को जून,13 में विदेशी दंपतियों को भारतीय अनाथ बच्चे गोद लेने की कानूनी अनुमति दी थी, उसके बाद यहां से अमेरिका के दंपतियों ने 1 बेटियां और दोहा के परिवार ने एक बेटी गोद ली है। जबकि इटली, स्पेन, अमेरिका और खाड़ी के देश से चार आवेदन अभी प्रोसेस में चल रहे हैं।
समाजसेविका प्रसन्ना भंडारी ने बताया कि विदेशी दंपती ऐसे बच्चे गोद लेते हैं जिनमें प्री-मैच्योर जन्म होने से कोई शारीरिक कमी हो या कोई विकलांगता हो। जुड़वां भाई-बहन या बड़े बच्चों को भारतीय की बजाय विदेशी दंपती गोद लेना पसंद करते हैं। कुछ दिन पहले उदयपुर से 2 साल का एक बच्चा यहां आया है, जिसकी एक आंख जन्म से खराब है। वह ठीक से बैठ भी नहीं सकता। उसे एक विदेशी दंपति ने गोद लेने की इच्छा जताई है।
डॉक्टर, इंजीनियर और सीए भी बन गई: आश्रय में रह रहीं बेटियों को रूचि के अनुसार आगे पढऩे की सुविधा मिलने से अब तक तीन बेटियां इंजीनियर, एक डॉक्टर और एक मेघा सीए कर चुकी हैं। समिति ने अब तक 38 बेटियों की शादी करके उनके परिवार बसाए हैं। इनमें से कुछ तो आज संभ्रांत परिवारों की बहू बनी हैं। अब सरकारी नियम बदलने से वयस्क होने के बाद बेटियों को जयपुर नारी शाला में भेज दिया जाता है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.