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एम्स हैरान! पढ़ाकर काबू किया लाइलाज बीमारी को

8 वर्ष पहले
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ञ्चअरविंद . कोटा

कोटा को कोचिंग सिटी के रूप में पहचान दिलाने वाले विनोद कुमार बंसल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी ((एक लाइलाज बीमारी)) के बावजूद 65 साल की उम्र में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह देख एम्स के डॉक्टर भी हैरान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का आज भी कोई इलाज नहीं है। आमतौर पर इस बीमारी से ग्रसित रोगी 15 साल से ज्यादा नहीं जीता। जबकि बंसल इस बीमारी के साथ 40 साल से जी रहे हैं, यही नहीं, रोजाना दो घंटे बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं। उनकी बीमारी1974 में ही डिटेक्ट हो गई थी।  बंसल ने अपनी जीवंत कहानी जनवरी 2014 में सीडी के जरिए एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग में हुए सेमिनार में सुनाई। शेष - पेज १२



इसलिए चर्चा में

: 25 साल की उम्र में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी लाइलाज बीमारी का पता चला। 40 साल से लगातार पढ़ा रहे हैं।

: 4 साल पहले हार्ट की बायपास सर्जरी और ड्यूरल हिमोटोमा ((ब्रेन से रक्त बहना)) जैसी मुश्किलों को पार करते हुए क्लास में पढ़ा रहे हैं।

: अब तक 1.50 लाख बच्चों को पढ़ाकर 17 हजार 475 को आईआईटी में दाखिला दिला चुके हैं।

खुशी ‘हीलिंग पावर’ का काम करती रही

न्यूरोफिजिशियन डॉ.जेसी मालू का कहना है कि ईश्वर ने उन्हें जीने की इच्छाशक्ति दी है। बंसल को बच्चों की आईआईटी में निरंतर सफलता से खुशी मिलती रही। जब शरीर को खुशी मिलती है तो एंडोर्फिन रिलीज होते हैं, जो हीलिंग पावर बढ़ाते रहते हैं। यह बात मेडिकल साइंस की समझ से भी बाहर है।



इंस्टीट्यूट में क्लास लेने के लिए तैयार बंसल।

क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विजय सरदाना कहते हैं, यह बीमारी जीन की अनियमितता से हो सकती है। मांसपेशियों को अवाश्यक प्रोटीन नहीं मिलने से वे निष्क्रिय हो जाती हैं। बाद में मरीज चलने-फिरने लायक नहीं रह जाता। पूरी दुनिया में इसका कोई इलाज नहीं है। रोगी सक्रिय रहने के लिए फिजिकल थैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी और स्पीच थैरेपी का सहारा लेते हैं। मेडिकल साइंस में इस पर कई रिसर्च चल रहे हैं। लेकिन, इलाज किस जेनरेशन में आएगा, कुछ नहीं कह सकते। ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ की प्रेसीडेंट संजना गोयल ((40)) खुद भी इस बीमारी से पीडि़त हैं। उनके अनुसार, देश में करीब 3.50 लाख वयस्क इसकी बीमारी की चपेट में हैं। वे सोलन में ऐसे मरीजों की सेवा कर रही हैं। उनका कहना है कि बंसल दुनिया के सभी मरीजों के लिए उम्मीद की किरण हैं।





मस्कुलर डिस्ट्रोफी हुई तो १५ साल बचती है जिंदगी, बंसल सर ४० साल से दे रहे मात