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अब कुक्कुट-बकरी व शूकर के लिए भी बनेंगे आश्रय स्थल

8 वर्ष पहले
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सुखदेव डागुर. करौली
मनरेगा योजना में व्यक्तिगत लाभ श्रेणी अंतर्गत अब कई प्रकार के कार्य होंगे। स्थायी जनोपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए अन्य विभागों की योजनाओं का कन्वर्जेंस कर भागीदारी बढ़ाने व अधिकाधिक कार्य करने के लिए राज्य सरकार ने लाइन विभागों को निर्देशित किया है। वर्ष 2014-15 की कार्य योजना में व्यक्तिगत लाभ के कुक्कुट, बकरी, शूकर आश्रय व चारा द्रोणिका जैसे पशुधन संवद्र्धन के लिए अवसंरचना के कार्यों का चयन किया जाएगा, वहीं 9 लाइन विभागों के 15-20 प्रतिशत राशि के कार्यों का समाविष्ट करना सुनिश्चित होगा।
गौरतलब है कि मनरेगा योजनांतर्गत ग्राम पंचायतों के अतिरिक्त अन्य लाइन विभागों की भागीदारी सुनिश्चित करने व अन्य योजनाओं के कन्वर्जेन्स या डवटेल द्वारा अधिक कार्य कराए जाने के लिए पिछले दिनों जयपुर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें पंचायती राज विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने लाइन विभागों से मनरेगा योजना में कार्यों के कंवर्जेस व डवटेल के बारे में जानकारी दी तथा विभागीय कार्यों में तकनीकी सलाह व सहयोग करने के तीन मुख्य एजेंडों पर चर्चा की गई। लाइन विभागों की सक्रिय भागीदारी से मनरेगा अंतर्गत गुणवत्तायुक्त कार्य होंगे और ग्राम पंचायतों पर कार्यभार भी कम रहेगा।
परियोजना निदेशक एवं पदेन उप सचिव ईजीएस कन्हैयालाल के अनुसार बैठक में मनरेगा योजनांतर्गत स्थाई परिसंपत्ति निर्माण, अन्य विभागों की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चितता की गई।
मुख्य सचिव ने सभी लाइन विभागों के अति. मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव व विभागाध्यक्षों को 15 प्रतिशत लागत के कार्य मनरेगा योजना में कराये जाने के निर्देश दिए। यदि पर्याप्त संख्या में लाइन विभागों के कार्य जिलों की वार्षिक कार्य योजना 2014-15 सम्मिलित नहीं किए जा सके हों तो निर्धारित प्रक्रियांतर्गत जिले की पूरक वार्षिक कार्य योजना में जुड़वाया जाए। इसके अलावा लाइन विभागों को मांग के अनुसार अकुशल श्रमिक उपलब्ध कराने व 40 प्रतिशत से अधिक सामग्री राशि को अन्य योजनाओं पर प्रभारित करने के निर्देश दिए।
व्यक्तिगत लाभ वाले कार्य
वर्ष 2014-15 में योजनांतर्गत पहली बार व्यक्तिगत लाभ श्रेणी में शामिल कार्यों में पशुपालन विभाग द्वारा अनुमत कम लागत व कम अवधि के कुक्कुट आश्रय, बकरी आश्रय, शूकर आश्रय व चारा द्रोणिका जैसे कार्यों का चयन कर प्राथमिकता से कराया जाएगा। हालांकि इससे पूर्व कई व्यक्तिगत श्रेणी के कार्य संचालित हैं।
ये हैं लाइन विभाग
मनरेगा से कन्वर्जेंस वाले लाइन विभागों में राज्य सरकार के कृषि, जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण,आजीविका मिशन, महिला एवं बाल विकास, राज्य भंडारण निगम, वन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग ((पीएमजीएसवाई)), पीडब्ल्यूडी ((एसएस)) तथा जल संसाधन विभाग शामिल हैं।
ये कार्य होंगे
पीडब्ल्यूडी व वन विभाग द्वारा विद्यमान सड़कों के किनारे पौधरोपण, बाढ़ नियंत्रण व संरक्षण, आपदा तैयारी में सुधार कार्य, सड़कों का जीर्णोद्धार, जलमग्न क्षेत्रों में अपवहन उपलब्धता, बाढ़ जल मार्गों को गहरा करने व मरम्मत, चॉयर जीर्णोद्धार, लोक आस्तियों का रखरखाव, गांव में पक्की आंतरिक सड़कें या गलियां जिनके अंतर्गत पाŸिवक नालियां व पुलिया भी है। विद्यमान पक्की सड़क से असंबद्ध ग्रामों को सड़क से जोडऩे जैसे कई प्रमुख कार्य होंगे। इसी प्रकार कृषि विभाग द्वारा सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने व आजीविका उपार्जन संबंधी कार्यों में डिग्गी, फार्म पौंड, बागवानी उद्यान, पौधारोपण व कृषि वानिकी के कार्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराना शामिल है।
तकमीना बीएसआर के आधार पर
मनरेगा योजनांतर्गत संपादित कराये जाने वाले सभी कार्यों के तकमीना ग्रामीण विकास विभाग की बीएसआर के आधार पर ही बनाए जाएंगे। लाइन विभागों द्वारा पारदर्शी तरीके से निविदा आमंत्रण के बाद वित्तीय स्वीकृति कलेक्टर जारी करेंगे।
गाइडलाइन की पालना जरूरी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ईजीएस के अधीक्षण अभियंता मुकेश माहेश्वरी ने 3 अप्रैल को कलेक्टर व कार्यक्रम समन्वयक को पत्र भेजकर बताया है कि ऑपरेशनल गाइडलाइन, 2013 के बिंदु संख्या 7.17 का उल्लेख कर कार्यों को शीघ्र पूरा कराने का सुझाव दिया है।
भारत सरकार के निर्देशानुसार भविष्य में कार्यों की तकनीकी स्वीकृति जारी करते समय कार्य पूर्णता के लिए आवश्यक अवधि की गणना कर उल्लेख तकनीकी स्वीकृति में करना होगा।



ग्राम पंचायतों का भार कम होगा

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्रीमत पांडेय ने सभी कलेक्टरों को पत्र भेजकर मनरेगा कार्यों के क्रियान्वयन में लाइन विभागों की कम सक्रियता पर चिंता जताई है। वर्तमान में योजनांतर्गत 93.3 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा तथा शेष 6.7 प्रतिशत कार्य सभी लाइन विभागों द्वारा संपादित कराया जाना बताया है। योजनांतर्गत लाइन विभागों से अधिक संख्या में कार्य कराने से अधिक गुणवत्तायुक्त कार्य संपादित होंगे, साथ ही स्थाई संपत्तियों का सृजन भी होगा। इससे ग्राम पंचायतों का कार्यभार भी कम हो सकेगा। पांडेय ने सभी लाइन विभागों के प्रमुख शासन सचिवों को वर्ष 2014-15 में विभाग की भागीदारी बढ़ाने व कम से कम 15 प्रतिशत करने के लिए अधिकाधिक संख्या में कार्य वार्षिक कार्य योजना में शामिल कराने की बात कही है।

नए कार्य भी शामिल हुए

बद्रीप्रसाद शर्मा, अधीक्षण अभियंता, ईजीएस जिप करौली का कहना है कि मनरेगा में व्यक्तिगत लाभ वाले कार्यों में कई प्रकार के नए कार्य शामिल हुए हैं। इनमें कुक्कुट पालन, बकरी व शूकर आश्रय आदि हैं, जबकि फूड सिक्योरिटी के तहत भंडारगृह और ग्राम पंचायतों में जमींन की उपलब्धता पर खेल मैदान जैसे प्रमुख कार्य भी होंगे।



मनरेगा योजना के तहत व्यक्तिगत लाभ श्रेणी के कई कार्य होंगे