अज्ञात बीमारी से छत्तीस बकरियों की मौत
भास्कर न्यूज - सोजत रोड
समीप के सारंगवास गांव में अज्ञात बीमारी से पिछले 15 दिनों में 36 बकरियों की मौत हो गई है। सारंगवास निवासी पशुपालक घीसाराम ने बताया कि बकरियों के मरने का यह सिलसिला गत पंद्रह दिनों से चल रहा है। रोजाना दो-तीन
बकरियां अज्ञात बीमारी के चलते मर रही है। पशु पालक ने सारंगवास व बगड़ी नगर के पशु चिकित्सालय में कार्यरत कम्पांउडर व जानकारों से बकरियों का उपचार भी करवाया, लेकिन बकरियों के मरने का सिलसिला जारी है।
चालीस में से बचे मात्र चार पशु
घीसाराम ने बताया कि एक माह पूर्व उसके पास 35बकरियां व 5भेड़ थी। इसके अलावा इनके दस बच्चे भी है, जो दो से तीन माह के है। पशुओं से उसके परिवार का भरण-पोषण हो रहा था, लेकिन रोजाना मर रही इन बकरियों के चलते परिवार पर भरण-पोषण का संकट भी गहरा गया है। घीसाराम ने बताया कि अब उसके पास मात्र 1 बकरी व 3 भेड़ शेष रह गई है।
आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए
॥घीसाराम का परिवार पूर्णतया निर्धन व बीपीएल श्रेणी का परिवार है। पशुपालन से ही इसके परिवार का गुजारा चल रहा था।परिवार को सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता मुहैया कराई जानी चाहिए।
-श्रवणसिंह जैतावत, बीजेपी युवा मोर्चा सोजत ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष सारंगवास।
पॉयजन से हुई मौत
॥पशुपालक बकरियों को अजाणिया घास खिलाते हैं। कई बार वह कच्ची होने पर जहरीली होती है। संभवत: बकरियों द्वारा जहरीली घास खाने से शरीर में पॉयजन फेल गया। उसी से इनकी मौत हुई है। यह बहुत ही जहरीला होता है। चंद घंटों में जानवर की मौत हो जाती है। चिकित्सक से परामर्श लेकर बकरियों को ड्रिप चढ़ाने के साथ इंजेक्शन भी दिए। इनका नियमित उपचार जरूरी है।
- माणक लाल कम्पांउडर, पशु चिकित्सालय,बगड़ी नगर।
उपचार
दिया था
॥ मैंने दस दिन पूर्व बकरियों का उपचार किया था। उन्हें आवश्यक दवाई व इंजेक्शन दिए। बकरियों की मौत संभवत: जहरीली घास खाने से हुई हैं।
- फूल नाथ, कम्पांउडर।
उपचार
दिया था
॥ मैंने दस दिन पूर्व बकरियों का उपचार किया था। उन्हें आवश्यक दवाई व इंजेक्शन दिए। बकरियों की मौत संभवत: जहरीली घास खाने से हुई हैं।
- फूल नाथ, कम्पांउडर।
पॉयजन से हुई मौत
॥पशुपालक बकरियों को अजाणिया घास खिलाते हैं। कई बार वह कच्ची होने पर जहरीली होती है। संभवत: बकरियों द्वारा जहरीली घास खाने से शरीर में पॉयजन फेल गया। उसी से इनकी मौत हुई है। यह बहुत ही जहरीला होता है। चंद घंटों में जानवर की मौत हो जाती है। चिकित्सक से परामर्श लेकर बकरियों को ड्रिप चढ़ाने के साथ इंजेक्शन भी दिए। इनका नियमित उपचार जरूरी है।
- माणक लाल कम्पांउडर, पशु चिकित्सालय,बगड़ी नगर।
आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए
॥घीसाराम का परिवार पूर्णतया निर्धन व बीपीएल श्रेणी का परिवार है। पशुपालन से ही इसके परिवार का गुजारा चल रहा था।परिवार को सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता मुहैया कराई जानी चाहिए।
-श्रवणसिंह जैतावत, बीजेपी युवा मोर्चा सोजत ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष सारंगवास।
चालीस में से बचे मात्र चार पशु
घीसाराम ने बताया कि एक माह पूर्व उसके पास 35बकरियां व 5भेड़ थी। इसके अलावा इनके दस बच्चे भी है, जो दो से तीन माह के है। पशुओं से उसके परिवार का भरण-पोषण हो रहा था, लेकिन रोजाना मर रही इन बकरियों के चलते परिवार पर भरण-पोषण का संकट भी गहरा गया है। घीसाराम ने बताया कि अब उसके पास मात्र 1 बकरी व 3 भेड़ शेष रह गई है।