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सारंगवास में वायरल से हुई बकरियों की मौत

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - सोजत रोड
समीप के सारंगवास गांव में पंद्रह दिनों में एक के बाद एक लगातार 36बकरियों की मौत हो गई थी। भास्कर में 28जनवरी को समाचार प्रकाशित होने के बाद पशुपालन विभाग हरकत में आया। गत तीन दिनों से पशुपालन विभाग के अधिकारी व कम्पांउडर सारंगवास में कैम्प कर पशुओं का उपचार कर रहे हैं। गुरुवार को अन्य पशुओं में संक्रमण नहीं फैले इसके लिए बीमार व स्वस्थ पशुओं को टीके लगाए गए। बुधवार को पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि यह एक वायरल जनित बीमारी है जो जल्दी से एक दूसरे में फैलती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर पशु की मौत हो जाती है। इसके लिए समय-समय पर यदि पशुओं को टीके लगवा दिए जाए तो इस पर नियंत्रण संभव है। पशुपालक घीसाराम ने बताया कि मंगलवार व गुरुवार को एक-एक और बकरी की मौत हो गई। गौरतलब है कि सारंगवास गांव में पशुपालक घीसाराम के यहां गत पंद्रह दिनों से रोजाना दो तीन बकरियां अज्ञात बीमारी के चलते मर रही थीं। पशुपालक ने उपचार भी करवाया, लेकिन बकरियों के मरने का सिलसिला जारी रहा। लगातार मौत से उसकी चालीस बकरियों में से अब मात्र एक बकरी शेष रह गई हैं। बकरियों की लगातार मौत से घीसाराम पूरी तरह टूट चूका है। सारंगवास के समाजसेवी श्रवण सिंह ने प्रशासन से पशुपालक को आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की है।
पोस्टमार्टम में हुआ पीपीआर बीमारी का खुलासा
॥सारंगवास गांव में बकरी के शव का पोस्टमार्टम किया, जिसमें पीपीआर बीमारी के लक्षण पाए गए। यह एक वायरल जनित संक्रमण रोग है जो एक दूसरे में जल्दी से फैलता है। समय-समय पर टीके लगाए जाने पर इस पर नियंत्रण संभव है। इसके लिए पशुपालन विभाग निशुल्क टीके उपलब्ध करवाता है।
- सुरेश कुमार, नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग, पाली।