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अतिक्रमण हटाने से पहले आ गया स्टे

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - मदनगंज-किशनगढ़
बरना के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान पर अतिक्रमण के मामले में सोमवार को उस समय नया मोड़ आ गया जब जमीन को लेकर कोर्ट के स्टे की बात सामने आ गई। अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर गत दिनों स्कूल पर ताला जडऩे की घटना के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को मंगलवार को अतिक्रमण हटाए जाने का आश्वासन दिया था। दूसरी ओर स्कूल बंद कराने को लेकर सरपंच व ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज कराए जाने का ग्रामीणों ने विरोध जताया। सोमवार सुबह ग्रामीणों ने सरपंच के नेतृत्व में किशनगढ़ शहर थाने का घेराव किया। ग्रामीणों के साथ स्कूल के छात्र भी थे। ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी व पुलिस उप अधीक्षक को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की।
जानकारी के अनुसार सुबह ११.३० बजे बरना सरपंच गोविंद सिंह डोबर के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण किशनगढ़ शहर थाने पहुंचे। वहां ग्रामीणों ने गत २४ जनवरी को स्कूल बंद कराए जाने के मामले में प्रधानाध्यापक की रिपोर्ट पर २५ जनवरी को सरपंच व ग्रामीणों पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज किए जाने का विरोध किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वेषतावश झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। अध्यापक-अध्यापिकाओं से अभद्र व्यवहार तो दूर, शिक्षक खुद अतिक्रमण हटाने की मांग में ग्रामीणों के साथ थे और उस दिन प्रधानाचार्य रामप्रसाद मालाकार भी उपखंड अधिकारी प्रभातीलाल जाट को ज्ञापन देने ग्रामीणों के साथ गए थे। ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी प्रभातीलाल जाट को ज्ञापन देकर सरकारी स्कूल के खेल मैदान से अतिक्रमण हटाने की मांग को जायज ठहराते हुए राजनीति द्वेषतावश मुकदमा दर्ज करवाने का आरोप लगाया। ज्ञापन देने वालों में भंवरलाल, रामेश शर्मा, महावीर मेघवंशी, गजेंद्र सिंह चौहान, मुकेश श्रीराम, केदार, मदनलाल जाट, रामेश्वर, गोपी, सांवरलाल, प्रताप रैगर आदि शामिल थे।
डीईओ ने मांगी थी रिपोर्ट
सरपंच गोविंद सिंह ने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापक ने किसी तरह की कोई रिपोर्ट किशनगढ़ शहर थाने में दर्ज नहीं कराई बल्कि प्रधानाध्यापक से डीई ओ ने दबाव डालकर लिखित में रिपोर्ट मांगी थी। प्रधानाध्यापक की रिपोर्ट की प्रतिलिपि किशनगढ़ शहर थाने में भिजवाई गई और प्रधानाध्यापक के नाम से मुकदमा दर्ज करवाया गया।
स्टे ने चौंकाया
प्रशासन को 28 जनवरी को सुबह 11 बजे खेल मैदान से अतिक्रमण हटाना था लेकिन एक दिन पहले कोर्ट से स्टे सामने आने से मामला उलझ गया है। सरपंच डोबर का आरोप है कि इस भूमि पर अतिक्रमियों ने पूर्व पटवारी श्रवणलाल चौधरी की मदद से स्टे ले लिया। गत 24 जनवरी को स्कूल बंद कराए जाने की घटना के बाद एसडीएम के निर्देश पर सीमाज्ञान भी करवाया गया था लेकिन स्टे की जानकारी देने की बजाय चार दिन बाद ग्रामीणों को अतिक्रमण हटाए जाने का आश्वासन दिया गया। सूत्रों का यहां तक कहना है कि कोर्ट से स्टे जुलाई माह में लिया गया था।




शीघ्र कार्रवाई होगी : एसडीएम

॥ग्रामीणों की शिकायत पर मैने पटवारी व गिरदावर को भेजकर जमीन का सीमाज्ञान करवा लिया है। वहां चार जनों द्वारा कोर्ट से स्टे की जानकारी सामने आई है। तहसीलदार को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए है। शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।

-प्रभातीलाल जाट, उपखंड अधिकारी

॥मैंने जो घटना हुई थी उसकी कॉपी अधिकारियों को दी थी। अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की गई। मैं कोर्ट में २४ जनवरी को उपखंड अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखने गया था। मेरे साथ तो किसी ने अभद्रता नहीं की।

-रामप्रसाद मालाकार, प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, बरना

॥हमने जनहित के लिए आवाज उठाई है। सच्चाई की आवाज को राजनीति द्वेषता के कारण झूठे मुकदमे लगाकर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल बंद करने के दिन प्रधानाचार्य भी हमारे साथ थे। लगातार राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।

-गोविंद सिंह डोबर, बरना सरपंच