पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अंतरात्मा का स्वरूप है धर्म : उर्मिलिया

अंतरात्मा का स्वरूप है धर्म : उर्मिलिया

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज - मदनगंज-किशनगढ़
सिटी रोड स्थित सुमेर क्लब में चल रही भागवत ज्ञान कथा में तीसरे दिन मौजूद भक्तों को प्रवचन देते हुए दीदी विजया उर्मिलिया ने कहा कि धर्म अंतरात्मा का स्वरूप है। जीवन में भक्ति ज्ञान का समन्वय आवश्यक है। भागवत हमारे प्रश्नो को पूर्ण विराम तक ले जाती है। दीदी श्री ने कहा कि महत्वाकांक्षी का संयम भी खतरनाक होता है। धर्म क्रिया में नहीं अपितु भावना मे होता है। दीदी ने धर्मान्तरण पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि हमें हिन्दु समाज के वंचित वर्ग को भी साथ लाना होगा। जब हम यह कार्य कर लेगे तभी इस प्रकार के धर्मान्तरण को रोक सकते है। हमें अपने से वंचित वर्ग को आंडबरहित होकर अपनाना होगा। जो सत्य, तप, पवित्रता और दया पर टिका हुआ यही भावना धर्म के लिए है। गौ सेवा के संदर्भ में दीदी ने कहा कि पहले कत्लखाने बंद होने चाहिए। नए नहीं खुले तभी हम गायो को पुष्ट कर सकते है। आज की कथा में दीदी ने वराह अवतार सहित चौबीस अवतारों की प्रासंगिकता पर विस्तार से कई प्रसंग सुनाकर अपनी बात कही। इस दौरान भगवान नरसिंह भगवान की जीवंत झाकी बनाई गई। इसे देखकर भक्त गण भाव विह्वल हो गए। इससे पूर्व गोविज्ञान अनुसंधान केन्द्र के अध्यक्ष राधेश्याम जैथलिया, मुख्य यजमान जोधराज, देवी सिंह शेखावत, विवेकानंद केन्द्र अजमेर की श्वेता दीदी तथा अन्य ने कथा वाचक विजया का माल्यापर्ण कर स्वागत किया। भागवत की आरती उतार कर कथा को विश्राम दिया गया। गोपाल कृष्ण आगीवाल ने बताया कि बुधवार की कथा में कृष्ण जन्मोत्सव पर कथा कही जाएगी।