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रसोई गैस का हो रहा है व्यावसायिक इस्तेमाल

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज. बारां
शहर समेत जिले में घरेलू गैस के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामले बढ़ते जा रहे हैं। व्यावसायिक के साथ कारों में भी घरेलू गैस उपयोग में ली जा रही है। आबादी क्षेत्र में रसोई गैस की अवैध रिफिलिंग से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद रोकथाम के प्रभावी बंदोबस्त नहीं हो सके हैं।
व्यावसायिक और घरेलू सिलेंडर के दामों में करीब 1800 रुपए के अंतर को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। शहर समेत जिलेभर में तीन कंपनियों की ओर से रसोई गैस वितरण के लिए एजेंसियां स्थापित कर रखी है। अकेले बारां शहर में 17 हजार रसोई गैस कनेक्शन धारक हैं। जिलेभर में 76 हजार रसोई गैस कनेक्शन धारक हैं। शादी, समारोह, पार्टियों, होटलों, टी स्टॉल सहित अन्य व्यावसायिक कार्यों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा पेट्रोल वाली कारों में भी गैस किट लगवा लिए गए हैं। इनमें घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों से गैस रिफिल की जाती है। एलपीजी किट लगवाने वाले चौपहिया वाहनों में धड़ल्ले से रसोई गैस भरी जा रही है। इसके लिए शहर के बीच ही चोरी-छिपे गैस भरने की दुकानें खुली हुई हैं। यहां गैस भरने का तरीका असुरक्षित होता है। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद कभी-कभी जांच के अलावा प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है। ऐसे में रसोई गैस की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग की शिकायत बनी रहती है। जिले में राजीव गांधी ग्रामीण घरेलू रसोई गैस योजना के तहत किशनगंज, भंवरगढ़, समरानियां, कोयला, बंडोरा, कवाई और बडग़ांव में करीब 10000 उपभोक्ता हैं।
हर महीने तय होते हैं दाम
बारां गैस एजेंसी के प्रबंधक गुणवंत पाटौदी ने बताया कि कामर्शियल और नॉन सब्सिडी सिलेंडर के दाम हर महीने तय होते हैं। जनवरी में व्यावसायिक सिलेंडर के दाम 2190 रुपए और नॉन सब्सिडी सिलेंडर 1201.50 रुपए तय हुए हैं। वहीं सब्सिडी वाला सिलेंडर 395.50 रुपए में दिया जा रहा है। नॉन सब्सिडी का सिलेंडर भी घरेलू की श्रेणी में ही आता है। कई उपभोक्ताओं की चार से पांच सब्सिडी सिलेंडर से आवश्यकता पूरी हो जाती है। ऐसे में उनके द्वारा शेष सब्सिडी के सिलेंडर खुद के स्तर पर कहीं भी बेचने की आशंका रहती है। रसद विभाग व पुलिस की ओर से पिछले साल अवैध गैस रिफिलिंग के मामलों में 5-6 कार्रवाई की गई थी। फिलहाल उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुसार निर्धारित समय पर सिलेंडर उपलब्ध करवाया जा रहा है।
लोगों के पास भी नहीं है विकल्प
पेट्रोल के दाम बढऩे से कई वाहन मालिकों ने कारों में एलपीजी किट लगवा लिए हैं। शहर समेत जिलेभर में कहीं भी एलपीजी गैस भरने का पंप ही नहीं है। ऐसे में वाहन मालिक चोरी छिपे रसोई गैस का वाहनों में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के छात्र, मजदूर, कारीगर भी भोजन बनाने आदि कार्यों के लिए दो से पांच किलो का छोटा गैस सिलेंडर रखते हैं। इनको भरने की उपयुक्त व्यवस्था नहीं है। यह लोग भी अवैध रूप से रिफिल करवाते हैं।
करीब 1800 रुपए का है अंतर
शहर में शादी, समारोह, होटल, टी स्टॉल सहित अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल में हर महीने 300 से 400 व्यावसायिक सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है। एक चाय विक्रेता ने बताया कि व्यावसायिक और सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में करीब 1800 रुपए का अंतर है। व्यावसायिक सिलेंडर उपयोग करने पर ज्यादा खर्च होगा। ऐसे में पड़ोसियों अथवा अन्य लोगों से घरेलू उपयोग की डायरियां लेकर सब्सिडी वाले सिलेंडर का इंतजाम करते हैं।
॥घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है। पिछले साल भी रसद विभाग व पुलिस ने कार्रवाई की थी। अवैध रिफिलिंग और परिवहन पर भी कार्रवाई होती है।
रामसिंह मीणा, डीएसओ