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प्रभू श्रीराम की तरह मर्यादित रहकर कार्य करना चाहिएइटावा में रामकथा जारी

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - इटावा
कृषि उपजमंडी परिसर में चल रही संगीतमयी श्रीरामकथा के तीसरे दिन संत श्रीरामजी बाबा कोकिल ने भगवान भोलेनाथ व माता सती के विभिन्न प्रसंग सुनाएं। इस दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में प्रभु श्रीराम की तरह मर्यादित रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने काम-क्रोध, मद व लोभ को छोड़कर भगवान में मन लगाने व अपने जीवन की डोर भगवान को सौंपने के लिए प्रेरित किया।
बाबा कोकिल ने कहा कि कलयुग में केवल राम नाम जपने से ही मनुष्य भव सागर से पार हो जाता है। इसलिए मनुष्य को सदैव प्रभू स्मरण, सत्संग आदि करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह वह धरा है, जहां पर भगवान राम ने अपने पिता के कहने पर 14 वर्ष का वनवास भोगा था, लेकिन आज माता-पिता की बात मानना तो दूर अपितु उनके साथ मारपीट करके घर से निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता का दर्जा भगवान के बराबर है जो कोई उनका अपमान करता है वह नरक का भागी हो जाता हैं। इसलिए इस नई पीढ़ी को बचाना है तो इनमें बाल्यकाल से ही संस्कार डालने होंगे। तभी ही हमारी संस्कृति बच सकेगी। कथा से पूर्व ललित नंदवाना ने रामकथा का पूजन अर्चन किया।
गणेशगंज. सोमवार को संगीतमय शिव महापुराण कथा कि पूर्णाहुति से पूर्व मन्ना लाल योगी ने जब यह धार्मिक प्रसंग सुना रहे थे, उनकी आंखों से अनायास आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि समय पलटता है, जिन्होंने बहुत कष्ट देखे है, समझ लो सुई का काम हो गया, अब रूई आने वाली है।