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घूस लेने वाले प्रिंसिपल की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने भेजा जेल

7 वर्ष पहले
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कोटा। रिश्वत के मामले में पकड़े गए ब्यावर के राजकीय पटेल उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल रामदेव चौधरी को गुरुवार को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनकी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। आदेश में कोर्ट ने इस तरह के मामले पर चिंता भी जताई है।

प्रिंसीपल रामदेव चौधरी इटावा के तीन स्कूलों स्वामी विवेकानंद शिक्षा निकेतन, माधव विधा मंदिर, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 12 वीं की फिजिक्स की प्रेक्टिकल परीक्षा लेने गए थे। वहां स्कूल संचालकों से परीक्षार्थियों को अच्छे नंबर देने के एवज में 64 हजार 500 रुपए की रिश्वत ली। एसीबी की टीम ने मुखबिर की सूचना पर बुधवार शाम को पकड़ा घूस के पैसे एसीबी को अलग-अलग जगह से मिले। प्रिंसिपल के पास से एक लिफाफे में 25 हजार व स्कूल के नाम की पर्ची तथा दूसरे लिफाफे में 30 हजार रुपए व दूसरे स्कूल के सभी विद्यार्थियों की सूची मिली थी।

एसीबी ने उन्हें गुरुवार को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दे दिए। इसके बाद आरोपी ने जमानत अर्जी पेश की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

मकान और प्लॉट के दस्तावेज मिले

अजमेर एसीबी टीम ने प्रिंसिपल चौधरी के सेंदड़ा रोड, अमृत कॉलोनी स्थित घर की तलाशी ली। गुरुवार सुबह 10 पहुंची टीम ने शाम 4 बजे तक तलाशी ली। सीआई इस्माइल खां ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चौधरी के घर नकदी या ज्वैलरी नहीं मिली है। उनकी अचल संपत्तियों के बारे में ब्यौरा जुटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चौधरी के घर से मिले प्लॉट एवं अन्य संपत्तियों के दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया है, जिनकी जांच की जाएगी। चौधरी का चार महीने पहले ही प्रमोशन हुआ। उन्होंने पिछले साल ही वहां 22 लाख रुपए में घर खरीदा। चौधरी ने हाल ही में एक प्लॉट भी खरीदा है।

परीक्षा के बहाने 3 दिन मेहमान नवाजी का लुत्फ उठाया

प्रिंसीपल चौधरी एक्सटर्नल बनकर परीक्षा लेने इटावा पहुंचे ही नहीं कि वहां से संचालकों से फोन पर संपर्क कर लिया। उसके बाद सीधे पहुंच गए माधव शिक्षा निकेतन वाले के पास। वहां एक दिन मेहमान बनकर रहे। एक और स्कूल स्वामी विवेकानंद शिक्षा निकेतन वाले ने मनुहार की तो वे उनके घर भी दो दिन मेहमान नवाजी का लुत्फ उठाते रहे। चौधरी ने ‘भास्कर’ को बताया वे यह जानते थे कि यह सब गलत है। फिर भी वहां रुके। उन्होंने सफाई दी कि यह सब मजबूरी के कारण करना पड़ता है। इटावा में कहीं रुकने की जगह नहीं थी और प्रशासन कुछ करता नहीं है। उनका कहना है कि सुबह शाम चाय-नाश्ता और सामान्य खाना ही खाया।

स्कूल संचालक ने कोडवर्ड से बताया किसको कितने नंबर दें

सीआई दीनदयाल भार्गव ने बताया कि स्वामी विवेकानंद स्कूल की परीक्षार्थियों की सूची मिली थी, जिसमें ए, बी, सी कोड वर्ड लिखा था, जिसमें ए के सामने 30, बी के सामने 29 और सी के सामने 28 अंक लिखे हुए थे। उसके बाद परीक्षार्थी के नाम के आगे ए, बी, सी लिखा हुआ था। एसीबी इन कोड वर्ड की भी जांच कर रही है।

मकान और प्लॉट के दस्तावेज मिले

अजमेर एसीबी टीम ने प्रिंसिपल चौधरी के सेंदड़ा रोड, अमृत कॉलोनी स्थित घर की तलाशी ली। गुरुवार सुबह 10 पहुंची टीम ने शाम 4 बजे तक तलाशी ली। सीआई इस्माइल खां ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चौधरी के घर नकदी या ज्वैलरी नहीं मिली है। उनकी अचल संपत्तियों के बारे में ब्यौरा जुटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चौधरी के घर से मिले प्लॉट एवं अन्य संपत्तियों के दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया है, जिनकी जांच की जाएगी। चौधरी का चार महीने पहले ही प्रमोशन हुआ। उन्होंने पिछले साल ही वहां 22 लाख रुपए में घर खरीदा। चौधरी ने हाल ही में एक प्लॉट भी खरीदा है।

धांधली से प्रतिभावान छात्रों का विश्वास उठ रहा है - कोर्ट

जज ने जमानत अर्जी में दिए आदेश में तल्ख टिप्पणी की है। उसमें कहा कि सार्वजनिक परीक्षा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्तर, विश्वविद्यालय स्तर, लोकसेवा आयोग व अन्य परीक्षाएं, इनमें बार-बार धांधली के मामले सामने आ रहे हैं। इससे प्रतिभावान छात्रों का विश्वास उठ रहा है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी से संबंधित लोगों में मनमर्जी अंक देने की प्रथा से प्रतिभावान व गरीब छात्र प्रभावित होते हैं। जिससे उन छात्रों में कुंठा होती है। किसी देश के प्रतिभावान छात्रों का कुंठित होना उस राष्ट्र के लिए गंभीर चिंतनीय विषय है। ऐसे में आरोपी को जमानत पर आजाद करना संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था एवं परीक्षा व्यवस्था तथा व्यापक लोक हित व राज्य हित में उचित नहीं है।

हजार 500 रुपए की रिश्वत ली। एसीबी की टीम ने मुखबिर की सूचना पर बुधवार शाम को पकड़ा घूस के पैसे एसीबी को अलग-अलग जगह से मिले। प्रिंसिपल के पास से एक लिफाफे में 25 हजार व स्कूल के नाम की पर्ची तथा दूसरे लिफाफे में 30 हजार रुपए व दूसरे स्कूल के सभी विद्यार्थियों की सूची मिली थी।