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दिनभर लाइन में लगे, पर नहीं मिला गेहंू

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - रावतभाटा
पिछले 4 महीने से खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद भी न तो प्रशासन और न ही सरकार लोगों को गेहूं बांटने की सही व्यवस्था कर पाई। नतीजा एक मजदूर को दिनभर लाइन में लगने के बाद भी गेहूं नहीं मिल रहा है। रावतभाटा में सोमवार को जनवरी महीने का गेहूं वितरण करने के लिए राशनडीलर दुकानों पर पहुंचे तो उपभोक्ताओं की इतनी अधिक भीड़ थी कि पुलिस के नियंत्रण में भी नहीं आई।
मौके पर एसडीएम राजूलाल गुर्जर पहुंचे तो उन्होंने मंगलवार को अन्य व्यवस्था करने के लिए राशन की तीनों दुकानों को बंद करवा दिया। तालों पर सील लगवा दी। प्रशासन की ओर से जिन उपभोक्ताओं को एक भी बार गेहूं नहीं मिला, उन्हें देने के आदेश दिए गए थे, लेकिन मौके पर लोगों की भीड़ इतनी अधिक और आक्रोशित थी कि उन्होंने कहा कि गेहूं सभी को मिलना चाहिए। लोगों को समझाया गया, लेकिन वह अपनी बात पर अड़े रहे। जिस पर एसडीएम ने दुकानों को नहीं खोलने और अन्य व्यवस्था का आश्वासन दिया। जिसके बाद उपभोक्ता अपने घरों को चले गए।
गेहूं कम, उपभोक्ता ज्यादा
रावतभाटा क्षेत्र में लगभग 16 हजार लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ा गया है। इसके लिए 8 00 क्विंटल गेहूं की आवश्यकता होगी, लेकिन मात्र 300 क्विंटल गेहूं आ रहा है। जिस कारण अफरा-तफरी रहती है। लोगों ने रविवार रात को ही राशनडीलर की दुकानों के बाहर लाइनें लगा ली। लोग 11 बजे तक लाइन में लगे रहे। एसडीएम के आने के बाद राशन की तीनों दुकानों को सील कर दिया गया। राशन डीलर कहते हंै कि गेहूं कम आ रहा है, जितना आ रहा है उतना बांट रहे है। राशनडीलर यह भी कहते है कि राशनकार्ड तो खूब बने है। उसकी तुलना में गेहूं नहीं आ रहा है। लोगों का कहना है कि वार्ड के अनुसार गेहूं बांटना चाहिए। अलग अलग दिन निर्धारित हों। खाद्य सुरक्षा योजना का गेहूं 3 दुकानों पर बांट ने की व्यवस्था है।
फर्जी भी बने हैं राशनकार्ड
लोगों के अनुसार एक ही परिवार में कई, कई राशनकार्ड बने हुए है। स्थिति यह है कि कई परिवारों के घर सदस्यों की मृत्यु हो गई है, लेकिन उन्होंने उनका नाम राशनकार्ड से नहीं हटवाया है। कई लोगों के परिवार में बेटियों की शादी हो गई है, लेकिन राशनकार्ड में नाम दर्ज है। इसके अलावा कई सरकारी कर्मचारियों के कार्ड पर भी खाद्य सुरक्षा की मोहर लगी है। वहीं कई संपन्न परिवारों के राशनकार्डोँ पर नगरपालिका की ओर से मोहर लगा दी गई है। जिनके पास सभी सुविधाएं उपलब्ध है। 53 प्रतिशत आबादी को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ मिलना था। जबकि इस योजना में 90 प्रतिशत लोगों के राशनकार्डोँ पर खाद्य सुरक्षा योजना की मोहर लगा दी गई।
कई उपभोक्ता दुकानों के बाहर सोए
सोमवार से खाद्य सुरक्षा योजना का गेहूं वितरण किया जाना था। इसके लिए उपभोक्ताओं को जानकारी मिली तो, कई उपभोक्ताओं ने दुकान के आगे खाली कट्टों को जमाकर अपने नंबर लगाए। कई उपभोक्ता रात को दुकानों के बाहर भी सो गए। सवेरे जब दुकानें खुली और उन्हें गेहूं नहीं मिला तो, निराश होकर घर लौट गए। इसके बाद दुकानों के बाहर कट्टों पर जो पत्थर रख गए थे, वह वहीं पड़े रहे। दुकानदारों को पत्थर उठाकर हटाने पड़े।



गेहंू के आवंटन में बढ़ोतरी होगी तभी व्यवस्था में हो सकेगा सुधार

॥आवंटन कम हुआ है। आवंटन बढ़ेगा तभी व्यवस्था सुधरेगी। हमारा प्रयास यह है कि सभी को गेहूं मिले। जिसमें यह व्यवस्था भी की गई है कि 3 महीने में कम से कम एक बार हर किसी को गेहूं मिल जाए। जिसे पिछले महीने गेहूं दिया गया है उसे अगले महीने नहीं दिया जाए। यह आदेश राशन डीलरों को दिए गए थे। ताकि सभी को गेहूं मिल जाए।

वीरेंद्रसिंह शेखावत जिला रसद अधिकारी चित्तौडगढ़

आक्रोशित लोगों को शांत करने के लिए गेहूं का वितरण रोका

॥राशन दुकानों पर उपभोक्ताओं को भीड़ अधिक थी। नई व्यवस्था से लोग आक्रोशित थे। सभी गेहूं देने की मांग कर रहे थे। यह संभव नहीं था। आक्रोशित लोगों को शांत करने के लिए गेहूं का वितरण रोक दिया गया। इसके लिए उच्च अधिकारियों से वार्ता कर व्यवस्था की जाएगी।

राजूलाल गुर्जर एसडीएम रावतभाटा

फर्जी भी बने हैं राशनकार्ड

लोगों के अनुसार एक ही परिवार में कई, कई राशनकार्ड बने हुए है। स्थिति यह है कि कई परिवारों के घर सदस्यों की मृत्यु हो गई है, लेकिन उन्होंने उनका नाम राशनकार्ड से नहीं हटवाया है। कई लोगों के परिवार में बेटियों की शादी हो गई है, लेकिन राशनकार्ड में नाम दर्ज है। इसके अलावा कई सरकारी कर्मचारियों के कार्ड पर भी खाद्य सुरक्षा की मोहर लगी है। वहीं कई संपन्न परिवारों के राशनकार्डोँ पर नगरपालिका की ओर से मोहर लगा दी गई है। जिनके पास सभी सुविधाएं उपलब्ध है। 53 प्रतिशत आबादी को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ मिलना था। जबकि इस योजना में 90 प्रतिशत लोगों के राशनकार्डोँ पर खाद्य सुरक्षा योजना की मोहर लगा दी गई।

कई उपभोक्ता दुकानों के बाहर सोए

सोमवार से खाद्य सुरक्षा योजना का गेहूं वितरण किया जाना था। इसके लिए उपभोक्ताओं को जानकारी मिली तो, कई उपभोक्ताओं ने दुकान के आगे खाली कट्टों को जमाकर अपने नंबर लगाए। कई उपभोक्ता रात को दुकानों के बाहर भी सो गए। सवेरे जब दुकानें खुली और उन्हें गेहूं नहीं मिला तो, निराश होकर घर लौट गए। इसके बाद दुकानों के बाहर कट्टों पर जो पत्थर रख गए थे, वह वहीं पड़े रहे। दुकानदारों को पत्थर उठाकर हटाने पड़े।

एसडीएम ने खाद्य सुरक्षा योजना का गेहूं वितरण रुकवाया, रात को ही दुकानों के बाहर लगी लाइन, गेहूं नहीं मिलने पर निराश लौटे उपभोक्ता, गेहूं कम होने से आई दिक्कत