सत्कार्य में लगाएं अपना जीवन
भास्कर न्यूज - सुल्तानपुर
क्षेत्र के मंडावरा कस्बे में स्थित गोविन्द देव जी के मंदिर की ५६वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में चल रही संगीतमय भागवत कथा के दौरान मंगलवार को कथावाचक वेदप्रकाश शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सत्कार्य करना चाहिए। उसे धार्मिक व सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने धार्मिक कार्यों के बारें में बताते हुए कहा कि मनुष्य का उद्धार धर्म के कार्यों से ही होता है।
उन्होंने यज्ञ का महत्व बताते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में यज्ञ करना चाहिए, उसे यज्ञ के साथ धार्मिक कार्यों के लिए दान देना चाहिए। मनुष्य जो भी कार्य करे उसे निष्ठा व लगन से करने से उसे यश प्राप्त होता हैं। उन्होंने सभी को सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने की सलाह दी।
उन्होंने भागवत को ज्ञानरूपी कल्पवृक्ष बताया और कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में इस कल्पवृक्ष को धारण करके अज्ञानता रूपी अंधकार को नष्ट करना चाहिए। मानव जीवन बड़े कष्टों के बाद मिलता है, इसलिए मानव जीवन को अपना सारा जीवन अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए।
उन्होंने सत्संग के बारें में बताते हुए कहा कि सत्संग से ही मनुष्य को संस्कार मिलते हैं व संस्कार के द्वारा मनुष्य का चरित्र निर्माण होता हैं। उन्होंने बालक का प्रथम गुरु माता को बताते हुए कहा कि एक बालक के चरित्र का निर्माण व संस्कार माता से ही उत्पन्न होते हैं।
उन्होंने कहा कि माता के बाद बालक में अपने परिवार व समाज से चरित्र का निर्माण होता हैं व समाज में ही बालक अच्छाई व बुराई के बारें में समझ पाता हैं। उन्होंने भगवान के तिलक का महत्व बताते हुए कहा कि तिलक भगवान के चरणों की प्रति होती हैं और इसे सिर पर धारण करने से मनुष्य के साथ भगवान का आशीर्वाद व कृपा बनी रहती हैं। भजनों पर महिलाओं द्वारा नृत्य किया गया एवं अंत में आरती उतारकर प्रसाद वितरण किया गया।
ईश्वर की भक्ति से बदलता है व्यक्तित्व
गणेशगंज. यदि ईश्वर को प्राप्त करना है तो हमारे अंदर व्यास वासना तृष्णा को हटाकर मीरा जैसा त्याग, सबरी जैसी सहनशीलता तुकाराम जैसी भक्ति का अनुकरण करना होगा। जिस प्रकार मिट्टी को सांचे में डालने पर वह मिट्टी का रूप ले लेती है। ठीक उसी प्रकार ईश्वर की असीम भक्ति से हमारा व्यक्तित्व बदल जाता है। उस समय व्यक्ति नर से नारायण बन जाता है। परमात्मा का द्वार भी एक सांचा है, जिस तक पहुंचते ही जीव शिवत्व को प्राप्त कर लेता है। उसका मोक्ष हो जाता है। यह विचार क्षेत्र के पीपल्दा खुर्द में शिवपुराण कथा के समापन के अवसर पर कथावाचक बालकनाथ योगी ने प्रवचनों के दौरान रखे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चिकित्सालय में जाने पर व्यक्ति मरीज बन जाता है। दुकान पर ग्राहक बनता है। अलग-अलग स्थानों पर वह बदल जाता है। उसी प्रकार ईश्वर के द्वार पर पहुंचने पर वह अमरत्व को प्राप्त करके अमर हो जाता है। इस संसार में महान बनता है। संसाररूपी तृष्णा, मोह, माया से पार लगना है तो ईश्वरनाम रूपी चाबी का इस्तेमाल करना ही पड़ेगा। वरना व्यक्ति इस भवसागर में कर्मों के बंधनों में बंधकर भटकता रहता है।
सत्यवादी इंसान रहता है दुख से दूर
इटावा. संसार में मनुष्य को सत्य की राह पर चलना चाहिए, लेकिन सत्य का रास्ता आसान नहीं होता है। सत्य पर चलना तलवार की धार पर चलने के बराबर होता है। सत्य बोलने वाले मनुष्य के पास दुख नहीं टिकता है। मनुष्य को जीवन में सत्य, अहिंसा, सदाचार, दया, धर्म के गुण अपनाते हुए सत्य की राह पर चलना चाहिए। यह बात मंगलवार को संत श्रीरामजी बाबा कोकिल ने इटावा कृषि उपजमंडी प्रांगण में चल रही रामकथा के चौथे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं से कही। उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, काया, लोभ, मोह, राग, द्वेष मनुष्य को नरक की ओर ले जाते हैं, जबकि मनुष्य क्षमा, सरलता, धर्म, संतोष को जीवन में अपनाता है तो उसका स्वर्ग एवं मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। बाबा कोकिल ने कहा कि जीवन में धन का लोभ ही मनुष्य के दुख का कारण बनता है। इसलिए मनुष्य को धर्म व भगवान की शरण लेनी चाहिए। यह सुख का आधार होते हैं। कथा के बीच विक्रम भैया द्वारा गाए गए भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। कथा से पूर्व मुख्य यजमान ललित नंदवाना, राकेश नंदवाना, नरेन्द्र नंदवाना, राजेन्द्र शास्त्री ने रामकथा का पूजन-अर्चन किया।
श्रीमद्भागवत बुद्धि और विद्या का भंडार
बिसलाई गांव में भैरुजी मंदिर में चल रही भागवत के दौरान मंगलवार को भागवताचार्य सूर्यकान्त शास्त्री रामपुरिया वालों ने भागवत का महत्व बताते हुए कहा कि जो इंसान सच्चे मन से भागवत कथा सुन लेता है और उस पर अमल करता है तो उसका कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि पुण्य उदय होने पर ही भागवत कथा सुनने का अवसर मिलता है। भागवत अमृत के लिए देवी-देवता भी तरसते हैं। मानव शरीर की प्राप्ति भी इसी फलस्वरूप होती है।