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रावतभाटा शहर में पिछले 10 साल में 34 प्रतिशत बढ़े गरीब

7 वर्ष पहले
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रावतभाटा। सरकार भले ही यह दावा करे कि संपन्नता आ रही है और गरीबों की संख्या कम हो रही है, लेकिन रावतभाटा के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 सालों में घोषित गरीब ((बीपीएल)) की संख्या में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रावतभाटा नगरपालिका के बीपीएल राशनकार्ड के आंकड़ों को माने तो, 2003 में शहर में घोषित गरीब ((बीपीएल)) की संख्या 489 थी। जो 2013 में बढ़कर 653 हो गई। गरीब बनने का सबसे बड़ा कारण बीपीएल परिवारों को मिलने वाली सुविधा है। कई परिवार वास्तव में गरीब है, लेकिन कई ऐसे में अमीर गरीब है, जिन्होंने राजनैतिक एप्रोच और प्रभाव से अपने को गरीब घोषित करा लिया है। स्थिति तो यह है कि रावतभाटा में गरीब बनने की होड़ मची हुई है।
शहर की आबादी 2011 के अनुसार लगभग 38 हजार है। नगरपालिका में अभी एक हजार परिवारों ने बीपीएल परिवारों की सूची में आने के लिए आवेदन कर रखे है। यानी आबादी का 10 प्रतिशत लोग ओर गरीब बनना चाहते है। रावतभाटा में लगभग 9 हजार 500 राशनकार्ड है। जिसमें 1 हजार परिवार बीपीएल में ओर आना चाहते है, जबकि 653 पहले से ही बीपीएल है।
बढ़ते है बीपीएल तो, बिगड़ती है राशन व्यवस्था - बीपीएल में नाम दर्ज होने के बाद राशनकार्ड बनता है। जिसके बाद बीपीएल कोटे में राशन और अन्य सुविधा मिलती है। रसद विभाग अभी भी 2003 के हिसाब से बीपीएल राशनकार्ड कोटे के गेहूं और अन्य राशन सामग्री भेज रहा है। जबकि 2014 में यह बढ़ गए है। ऐसे में कई वास्तविक गरीबों को राशन नहीं मिल पाता, जिससे राशन व्यवस्था बिगड़ती है।