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00फिर बंद हुई सीबीसी मशीन, नहीं हो पा रही 20 जांचेंमुफ्त जांच योजना : शुरुआत के बाद चौथी बार बंद हुई मशीन, पुरानी पर हो रहा काम

8 वर्ष पहले
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उदयपुर -!- एमबी अस्पताल में निशुल्क जांच योजना भले ही शुरू कर दी गई, लेकिन मरीजों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। कारण, सेंट्रल लैब में दस साल से चल रही मशीनें आए दिन दम तोड़ देती हैं। पैथोलॉजी विभाग में क्षमता से तिगुना भार झेल रही सीबीसी मशीन सोमवार देर रात फिर बंद पड़ गई। योजना शुरू होने के बाद यह चौथा मौका है जब मशीन बंद पड़ गई हो। जानकारी के अनुसार रविवार से ही मशीन ने जांचों में गड़बडिय़ां करना शुरू कर दिया था। सोमवार को इसने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया। बताया गया कि योजना शुरू होने से पहले जहां मशीन पर 150 से 200 जांचें रोज की जाती थीं, बाद में जांचें करीब 500 प्रतिदिन हो गईं। बेतहाशा भार से आए दिन मशीन खराब हो जाती है। इसके खराब होने से रेड ब्लड सेल काउंट, पीसीवी, प्लेटलेट काउंट, क्लॉटिंग टाइम, पीबीएफ आदि जांचें नहीं हो पा रही हैं।
प्राइवेट लैब में जांचें पड़ रही भारी : सोमवार को मशीन खराब होने के बाद कर्मचारियों ने मरीजों को बैरंग लौटाना शुरू कर दिया। ऐसे में उन्हें प्राइवेट लैब में जांचें करवानी पड़ी। मंगलवार को भी ऐसे ही हालात रहे। मरीजों को प्राइवेट लैब में 250 से 500 रुपए तक खर्च कर जांचें करवानी पड़ रही हैं।
नई मशीनों की खरीद नहीं
आए दिन मशीनों के खराब हो जाने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।कभी सीबीसी मशीन बंद रहती है तो कभी ऑटो एनालाइजर। कभी यूरीन जांचें नहीं हो पाती तो कभी किट के अभाव में मलेरिया, डेंगू आदि की जांचें नहीं हो पाती हैं। पिछले दिनों ही ऑटो एनालाइजर मशीन के बंद हो जाने से 20 जांचें बंद हो गई थीं। तब बताया गया था कि विभाग में तीन ऑटो एनालाइजर मशीन की खरीद अंतिम चरण में है, लेकिन यह काम नहीं हो पाया। इसके अलावा आए दिन यूरीन जांचें भी बंद हो जाती हैं।मशीन में लगने वाले रोल नहीं होने से यूरीन संबंधी जांचें नहीं हो पाती। प्रशासन ने कुछ रोल उपलब्ध कराए, लेकिन तीन दिन बाद रोल खत्म हो जाने से यूरीन जांचें फिर बंद होने के आसार हैं।