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आयकर खत्म करने का सवाल

8 वर्ष पहले
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क्या आयकर को पूर्णत: समाप्त करना संभव है। फिलहाल ये मांग योग गुरु बाबा रामदेव ने उठाई है। बल्कि वे चाहते हैं कि सारे वर्तमान कर खत्म कर दिए जाएं और उनकी जगह सिर्फ बैंक ट्रांजेक्शन टैक्स लागू किया जाए। यह विचार मौलिक रूप से उनका है। ये कहना कठिन है। इसलिए कि करीब एक महीने पहले कुछ ऐसा ही बयान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडगरी ने भी दिया था। गडकरी उस समिति के प्रभारी हैं जो पार्टी का विजन 2025 दस्तावेज तैयार कर रही है। अत: उसे गंभीरता से लिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा आयकर, सेवाकर और उत्पाद शुल्क को पूरी तरह खत्म करने का वादा कर सकती है। गडकरी के मुताबिक भारत में कुल राजस्व 14 लाख करोड़ रुपए है जिसमें 2.5 लाख करोड़ आयकर से आता है। तमाम खर्चों पर एक से डेढ़ प्रतिशत ट्रांजेक्शन टैक्स लगा दिया जाए तो राजकोष को होने वाले नुकसान की भरपाई हो सकती है। हालांकि बाद में ऐसी खबरें आईं कि इस प्रस्ताव पर पार्टी में सहमति नहीं है। इसके पहले 1990 के दशक में पीवी नरसिंह राव सरकार ने भी ऐसे प्रस्ताव पर विचार किया था लेकिन उसे अमल योग्य नहीं माना गया। कहा जाता है कि 1950 के दशक में तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी ने भी इस पर विचार किया था लेकिन इसे व्यावहारिक नहीं समझा गया। जाहिर है, इस प्रस्ताव के साथ अनेक सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दिक्कतें हैं। इसीलिए दुनिया में सिर्फ संयुक्त अरब अमीरात ऐसा देश है, जहां आय कर नहीं लगता। गौरतलब है, आयकर को राजस्व के पुनर्वितरण के जरिए समाज में आर्थिक न्याय स्थापित करने का तरीका भी माना जाता है। यह टैक्स उन्हें देना होता है जिनकी आमदनी अधिक है। बाकी करों का बोझ समान रूप से सभी तबकों पर पड़ता है। इसीलिए आयकर या प्रत्यक्ष करों में कटौती की वकालत सामान्यत: दक्षिणपंथी पार्टियां करती हैं। प्रधानमंत्री पद के भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बाबा रामदेव के एजेंडे पर विचार करने का आश्वासन दिया है। इस क्रम में अवश्य ही उनके सामने ये सारे मुद्दे आएंगे। क्या वे अपनी पार्टी की धनी वर्ग समर्थक छवि बनाना चाहेंगे। जाहिर है, उन्हें काफी सोच समझ कर निर्णय लेना होगा।