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चर्चा है ‘गिरिराजजीञ्ज नाथद्वारा पधार रहे हैं, श्रीजी मंदिर वाले अनभिज्ञ

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - नाथद्वारा
मथुरा से भगवान श्री गिरिराज के नाथद्वारा पधारने के सात दिवसीय आयोजन को लेकर श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा में असमंजस बना हुआ है। नाथद्वारा में लगे बैनर और निमंत्रण पत्रिका में सातों दिन का कार्यक्रम तय बताया जा रहा है, लेकिन मंदिर प्रशासन और तिलकायत परिवार अनभिज्ञता जता रहा है। निमंत्रण पत्रिका में तिलकायत राकेश महाराज को बिना स्वीकृति लिए मुख्य अतिथि दर्शाने को लेकर स्वयं तिलकायत ने नाराजगी जाहिर की है तो मंदिर प्रशासन के पास अधिकृत जानकारी नहीं होना सामने आया है। दूसरी ओर जतीपुरा के कुछ पंडे भी इस आयोजन को परंपरा के विरुद्ध बताते हुए विरोध कर रहे हैं। बैनर और निमंत्रण पत्रिका के आधार पर श्रीगिरिराजजी मुखारबिंद गुधैनिया सेवा समिति, आन्यौर, जतीपुरा, मथुरा ((उत्तरप्रदेश)) की ओर से श्रीगिरिराजजी का नाथद्वारा में श्रीनाथजी, श्रीनवनीत प्रियाजी, महाप्रभुजी से मिलन, होली महोत्सव, छप्पन भोग का 29 जनवरी से 5 फरवरी तक कार्यक्रम प्रस्तावित है।



॥आयोजन को लेकर हमारी समिति के प्रतिनिधि मंडल ने पिछले दिनों मुंबई जाकर तिलकायत राकेश महाराज से चर्चा की थी। चूंकि तिलकायत स्वयं जतीपुरा के हैं, लिहाजा उन्होंने इसे अपना ही कार्यक्रम मानते हुए सहमति दी थी। निमंत्रण पत्रिका में मुख्य अतिथि बनाने की भी चर्चा हुई थी।

दाऊदयाल कौशिक, मंत्री, श्रीगिरिराजजी मुखारबिंद गुधैनिया सेवा समिति, आन्यौर, जतीपुरा, मथुरा

इनका कहना है

॥इस आयोजन व मनोरथ के आयोजन की जानकारी नहीं है। तिलकायत महाराज से नाम छापने के लिए अनुमति भी नहीं ली। कौन सा मनोरथ है, कौन से स्वरूप पधार रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है। बिना तिलकायत महाराज की अनुमति नाम छापना उचित नहीं है।

-विशाल बावा, तिलकायत पुत्र।



तिलकायत ने कहा मेरी अनुमति बिना जोड़ा नाम, जतीपुरा के कुछ पंडे भी बता रहे हैं परंपरा के विरुद्ध

मथुरा की एक समिति के सात दिवसीय आयोजन को लेकर निमंत्रण पत्रिका छप चुकी हैं, नाथद्वारा में लगे बैनर

शहरवासी, अधिकारी अनजान : आयोजन को लेकर शहरवासियों व मंदिर के अधिकारियों के पास इतनी सी जानकारी है कि कार्यक्रम हो रहा है। लेकिन मनोरथ कौन सा है, कौन से स्वरूप पधार रहे हैं यह आयोजकों ने नहीं बताया है।



मंदिर से सुविधाएं मांगी, निर्णय नहीं हुआ : आयोजन समिति के सदस्यों व पदाधिकारियों ने नाथद्वारा मंदिर मंडल से धर्मशाला व अन्य सुविधाओं की मांग की है। गत दिनों समिति के प्रतिनिधि मंडल द्वारा की गई इस मांग पर निर्णय नहीं हो पाया है।



वहां भी विरोध : श्रीगिरिराजजी के नाथद्वारा में कार्यक्रम का जतीपुरा आन्यौर, गोवर्धन का पंडा समाज भी विरोध कर रहा है। में चर्चा है कि यह कार्यक्रम श्रीजी मंदिर के तिलकायत की सहमति से हो रहा है, जबकि तिलकायत इससे इनकार कर रहे हैं।



29 जनवरी को जतीपुरा मथुरा से श्रीगिरिराजजी के डोला के साथ नाथद्वारा के लिए प्रस्थान, 30-31 जनवरी महुआ व दौसा, 1-2 फरवरी जयपुर, 3 फरवरी अजमेर, 4 को फरवरी ब्यावर होते हुए 5 फरवरी को नाथद्वारा में प्रवेश होगा। नाथद्वारा में 7 फरवरी को होली महोत्सव, 8 को लट्ठमार होली, 9 को हुरंगा महोत्सव, 10 को निकुंज मनोरथ, 11 को छप्पन भोग और 12 फरवरी को विदाई समारोह होगा। श्रीगिरिराजजी के कार्यक्रम मंदिर की जगह धर्मशाला में होंगे। धर्मशाला कौनसी है इसका निर्णय नहीं हुआ है। आमंत्रण पत्र सिर्फ नाथद्वारा छपा है।

असमंजस के ३ कारण ये भी

ऐसा है प्रस्तावित सात दिवसीय आयोजन

माना जाता है कि श्रीगिरिराजजी पर्वत पर श्रीनाथजी प्रभु का प्राकट्य 536 वर्ष पूर्व हुआ था। श्रीगिरिराजजी पर्वत के प्राकट्य स्थल पर वैष्णव दुग्धाभिषेक व दर्शन करते हैं। श्रीगिरिराजजी पर्वत की 7 कोसी परिक्रमा की जाती है। श्रीगिरिराजजी पर्वत को कृष्ण ने उठाया था। गोवर्धन पर्वत स्वयं स्वरूप हैं जहां श्रीजी का प्राकट्य हुआ था।

श्रीजी का प्राकट्य स्थल है श्री गिरिराजजी