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अफीम की फसल को बर्बाद कर रहे रोजड़े, किसान चिंतित

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - प्रतापगढ़
पिछले कुछ वर्षों से रोजड़े किसानों के लिए सिरदर्द बन चुके है। रोजड़ों का झुंड खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन दिनों अफीम की फसल को रोजड़ों से बचना किसानों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है।
जिले के किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद है। लेकिन खेतों में सैकड़ों की तादाद में विचरण करने वाली रोजड़ों ने किसानों की नींद उड़ा रखी है। इन दिनों खेतों में अफीम की फसल लहलहा रही है। इस काले सोने को बेचकर किसान पीला सोना प्राप्त करते हैं, लेकिन इस काले सोने पर रोजड़ों का खतरा मंडरा रहा है। स्थिति यह है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद काले सोने की फसल को बचाने के लिए किसान परिवार सहित रात भर चौकीदारी कर रहे हैं।




अफीम के नशे में नीलगायें खेत में लगाती हैं लोट

रोजड़ों को दूर रखने के लिए ये जतन भी

रोजड़ों को खेतों से भगाने के लिए किसान पूरी रात चौकीदारी करता है। इन्हें खेतों से दूर रखने के लिए किसान तरह-तरह के उपाय भी करते हैं। रोजड़ों को डराने के लिए अफीम के खेत के चारों और चमकीली रंग-बिरंगी पट्टी बांध देते हैं। खेत पर बड़े-बड़े आकार के बजूका टांग देते हैं। रात में पटाखे छोड़कर इन्हें भगाने का प्रयास करते हैं। रात भर आग लगाकर चौकीदारी करते हैं। लेकिन इन उपायों से भी किसान रोजड़ों से अपने खेतों को नहीं बचा पा रहे हैं। गौरतलब है कि रोजड़ों की समस्या से परेशान किसान कुछ समय पूर्व तो किसान सीतामाता के जंगल में टाइगर को फिर से लाने ((रीलोकेट)) की भी मांग कर चुके हैं।

झुंड के झुंड पहुंचते हैं खेतों में

निकटवर्ती नागदेड़ा, कोटड़ी, विरावली के ग्रामीणों ने बताया कि रोजड़ों की बढ़ती संख्या से किसानों की नींद उड़ी हुई है। मध्यप्रदेश की सीमा से सटे इस क्षेत्र के गांवों में तो किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। रतलाम जिले के डेलनपुर, पंचेड़, पलदुना, खेड़ी, दिवल, खोखरा, आंबा, शेरपुर, कुशलगढ़, गुडरखेड़ा, सरसाना, इतराना, नांदलेटा, चांचरी, मथुन आदि गांवों से लोग इनको भगाते हैं तो यह प्रतापगढ़ जिले में आकर फसलों को नुकसान पहुंचा रही है।



रोजड़ों को अफीम के नशे की इतनी लत पड़ गई है कि हर रोज शाम होते ही झुंड के झुंड अफीम के खेतों में आ घुसते हैं और मौका मिलते ही अफीम के फूल-पत्तों को चट कर जाते हैं। दिन को रोजड़ों के झुंड जंगल में किसी एकांत जगह पर छिपे रहते हैं। रोजड़े खेत पर ही लोट लगाने लगती है। कई बार नशे में किसी गड्ढे या बिना मुंडेर के कुएं में गिर जाती हैं। मंगलवार को छोटीसादड़ी क्षेत्र में भी कुएं में गिरे रोजड़े को निकालने में नगर पालिका के कर्मचारियों व ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।



फसल को बचाने के लिए ठंड में रात भर कर रहे हैं खेतों की रखवाली, उजले चादरों की बाड़ भी लगाई