समता व आस्था ही जीवन की वास्तविकता
खेरवाड़ा - आर्यिका संगममति ने कहा कि पूजा-पाठ व जाप का लाभ तभी होगा तब जीवन में समता, आस्था व धर्माचरण को ग्रहण किया जाए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो इनका लाभ संभव नहीं है। आर्यिका संगममति बुधवार को ऋषभदेव निर्वाण महोत्सव के मौके पर स्थानीय शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में संबोधित कर रही थी। आर्यिका ने कहा कि संसार में कहीं भी सुख नहीं है। यदि संसार में सुख होता तो तीर्थंकर क्यों त्यागते? उन्होंने कहा कि जीवन में श्रम को महत्व दें। अपने भावों को निर्मल बनाएं, जिन परिवारों में धार्मिकता होगी, वहीं शांति आएगी। धर्म सभा में समाज के पारस जैन, धनपाल गांगावत, पूर्व अध्यक्ष श्यामसुंदर कोठारी, रमेश पंचोली, शकुंतला कोठारी आदि मौजूद थे।
जन्म दिवस समारोह 9 को : शांतिनाथ मंदिर में विराजित आर्यिका संगममति का जन्म दिवस व गणिनी पद दिवस समारोह 9 फरवरी को मनाया जाएगा। समारोह के आयोजन की तैयारियां शुरू की जा चुकी हैं।