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अपनों को खोने वालों को अब लगता है हेलमेट होता तो बच जाती जान

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - राजसमंद
जिले को जोडऩे वाले नेशनल व स्टेट हाइवे पर सड़क हादसों में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ रहा है। पुलिस का मानना है कि इनमें कई ऐसे दुपहिया वाहन चालक भी थे, जो हेलमेट पहने होते तो शायद उन्हें बचाया जा सकता था। लोगों के जीवन से जुड़ी इस मुहिम में जिले की नई एसपी ने हाइवे पर हेलमेट की अनिवार्यता कर दी है, ऐसे में दुपहिया चालकों को भी हेलमेट पहनने को दिनचर्या में उतारना होगा। भास्कर ने सड़क हादसों में मरने वालों के परिचितों व रिश्तेदारों से मौत के कारणों को लेकर बातचीत की तो मृतकों के परिजनों का भी यही कहना था कि हेलमेट पहने होते तो उन्हें बचाया जा सकता था। हेलमेट की उपयोगिता अब वे लोग भी मानने लगे हैं, जिन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में अपनों को खो दिया है।



॥मेरा छोटा भाई अरुण कुमार ((22)) मार्च 2013 में देवली से घर आ रहा था। रास्ते में सामने से आती दूसरी बाइक ने टक्कर मार दी। सिर पर चोट लगने से गंभीर घायल अरुण को उदयपुर अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। अरुण भी बिना हेलमेट के गाड़ी चला रहा था। हमें आज भी इस बात पर पछतावा है कि अरुण ने हेलमेट लगाया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

दिनेश यादव, कुंवारिया



हेलमेट की अनिवार्यता 5 से

हादसे रुकवाने के लिए एसपी श्वेता धनकड़ ने जिले से जुड़े नेशनल व स्टेट हाइवे पर दुपहिया वाहन चालक व पीछे बैठने वालों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता करवा दी है। इसके तहत 4 फरवरी तक आम जन से हेलमेट पहनने के लिए समझाइश की जाएगी। 5 फरवरी से बिना हेलमेट पहने मिलने वाले दुपहिया वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई होगी।

यूं बढ़ा सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा

जिला पुलिस के अनुसार वर्ष 2012 में सड़क दुर्घटनाएं 504 हुई थी। इसमें करीब 213 लोगों की मौत हो गई। वहीं 760 जने घायल हो गए थे। वर्ष 2013 में बढ़कर आंकड़ा 532 हो गया। इसमें 228 लोगों की मौत व 854 लोग घायल हो गए थे। पुलिस का कहना है कि हादसों में मरने वालों में से 20 फीसदी लोग बिना हेलमेट के थे।

भास्कर ने हादसों में हेलमेट के अभाव में जान गंवाने वालों के परिवार व परिचितों ने कहा ये बोझ नहीं जीवन का सुरक्षा कवच है

जिले में हेलमेट की अनिवार्यता 5 से

इन्होंने साझा की हेलमेट की अनिवार्यता

॥मेरा मित्र धोइंदा निवासी बृजेश कुमावत ((24)) अपने बड़े भाई भरत के साथ एक साल पहले बाइक पर पेट्रोल भरवाने जा रहा था। पीपरड़ा में सामने से आती बस ने टक्कर मार दी। सिर पर गंभीर चोट लगने से दोनों की घटना स्थल पर मौत हो गई गई थी। इस हादसे के बाद मैंने खुद में बदलाव किया और मित्रों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया।

खुशकमल कुमावत, धोइंदा

॥एक साल पहले आमेट निवासी मेरा रिश्तेदार नवीन शर्मा भी हेलमेट नहीं होने के कारण सड़क हादसे में जान गंवा चुका है। राजनगर हाइवे पर ट्रक ने बाइक को चपेट में ले लिया। हेड इंजरी से उसकी मौत हो गई। इस हादसे के बाद मैं हमेशा हेलमेट पहनकर ही गाड़ी पर बैठता हूं।

दीपक शर्मा, कांकरोली



दीपक शर्मा